Go to content Go to menu
 


क़ुरआने मजीद अहले बैत--1 Quran Majeed Ahle Bait --1

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

इस्लामी रिवायतों की बिना पर क़ुरआने मजीद की बे शुमार आयतें अहले बैत अलैहिम अस्सलाम के फ़ज़ाइल मनाक़िब के गिर्द घूम रही हैं और इन्हीं मासूम हस्तियों के किरदार के मुख़्तलिफ़ पहलुओं की तरफ़ इशारा कर रही हैं। बल्कि कुछ रिवायतों की बिना पर पूरे कुरआन का ताल्लुक़ इनके मनाक़िब, इनके मुख़ालिफ़ों के नक़ाइस, इनके आमाल किरदार और इनकी सीरत हयात के आईन दस्तूर से है। लेकिन यहाँ पर सिर्फ़ उन्हीं आयतों की तरफ़ इशारा किया जा रहा है जिनके शाने नुज़ूल के बारे में आलमे इस्लाम के आम मुफ़स्सिरों ने भी इक़रार किया है कि इनका नुज़ूल अहले बैते अतहार के मनाक़िब या उनके मुख़ालिफ़ों के नक़ाइस के सिलसिले में हुआ है।

उलमा--हक़ ने इस सिलसिले में बड़ी बड़ी किताबें लिखी हैं और मुकम्मल तफ़सील के साथ आयात उनकी तफ़्सीर का तज़करा किया है। हम यहाँ पर उसका सिर्फ़ एक हिस्सा ही पेश कर रहे हैं

बिस्मिल्लाह हिर्रहमानिर्रहीम

1- “وَكَذَلِكَ جَعَلْنَاكُمْ أُمَّةً وَسَطًا لِّتَكُونُواْ شُهَدَاء عَلَى النَّاسِ”(
बक़रा 144)

उम्मते वसत हम अहले बैत हैं।(अमीरूलमोमीनीन())(शवाहिदुत तनज़ील जिल्द 1 पेज
92)

2- (
आले इमरान
62)

यह आयत मुबाहेले के मौक़े पर अहलेबैत की शान में नाज़िल हुई है।(तफ़सीरे जलालैन, सहीय मुस्लिम किताब फ़ज़ाएलुस सहाबा, ग़ायुम मराम पेज 300 वग़ैरह।
)

3- “وَمَن يَعْتَصِم بِاللّهِ فَقَدْ هُدِيَ إِلَى صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ”(
आले इमरान
101)

अली() उनकी ज़ौजा और उनकी औलाद हुज्ज्ते ख़ुदा है। इनसे हिदायत हासिल करने वाला सिराते मुस्तक़ीम की तरफ़ हिदायत पाने वाला है।(रसूले अकरम())(शवाहिदुत तनज़ील जिल्द 1 पेज
58)

4- “وَاعْتَصِمُواْ بِحَبْلِ اللّهِ جَمِيعًا وَلاَ تَفَرَّقُواْ”(
आले इमरान
104)

(بِحَبْلِ اللّهِ)
से मुराद हम अहले बैत() हैं।(इमाम सादिक़())( शवाहिदुत तनज़ील जिल्द 1 पेज
131)

5- “يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُواْ أَطِيعُواْ اللّهَ وَأَطِيعُواْ الرَّسُولَ وَأُوْلِي الأَمْرِ مِنكُمْ”(
निसा
60)

(وَأُوْلِي الأَمْرِ)
से मुराद आईम्मा अहले बैत हैं।(इमाम जाफ़र सादिक़())( यनाबीऊल मवद्दत पेज
194)

6- “وَلَوْ رَدُّوهُ إِلَى الرَّسُولِ وَإِلَى أُوْلِي الأَمْرِ مِنْهُمْ لَعَلِمَهُ الَّذِينَ يَسْتَنبِطُونَهُ مِنْهُمْ”(
निसा
84)

(وَأُوْلِي الأَمْرِ)
से मुराद आईम्मा अहले बैत हैं।(इमाम मुहम्मद बाक़िर, इमाम जाफ़र सादिक़())( यनाबीऊल मवद्दत पेज
321)