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इमाम महदी ज़हूर की अलामात Imam Mahdi zahoor a.j. ki alaamat hindi

2011-07-11

शबलंजी का नूरूल अबसार में अबू जाफ़र (अ) से इमाम महदी के ज़हूर की अलामात से रिवायत की गयी है हज़रत ने फ़रमाया:

1- मर्द औरतों से मुशाबेहत इख़्तियार करेंगें और औरतें मर्दों से।
2- औरतें जानवरों पर सवार होगीं।
3- लोग नमाज़ पढ़ना छोड़ देगें।
4- ख़्वाहिशे नफ़्स की पैरवी करेंगें।
5- खून बहाना मामूली बात समझी जायेगी।
6- सूदख़ोरी आम होगी और उसके ज़रीये कारोबार होगा।
7- ज़ेना खुल्लमखुल्ला किया जायेगा।
8- मकानों को मज़बूत बनाया जायेगा।
9- रिश्वत का बाज़ार गर्म होगा।
10- लोग झूट को हलाल क़रार देंगें।
11- ख़्वाहिशाते नफ़्सानी की पैरवी करेंगें।
12- दीन को दुनिया के बदले फ़रोख़्त कर देंगें।
13- क़त ए रहम करेगें।
14- हिल्म व बुर्दबारी को कमज़ोर समझा जायेगा।
15- ज़ुल्म पर फ़ख्र किया जायेगा।
16- उमारा फ़ासिक़ होगें।
17- वोज़ारा झुटे होगें और अमीन ख़्यानतकार।
18- मददगार ज़ालिम होगें और क़ारी फ़ासिक़।
19- ज़ुल्म ज़्यादा होगा।
20- तलाक़ें ज़्यादा होगीं।
21- ज़ालिम की शहादत को क़बूल किया जायेगा।
22- शराब आम होगी।
23- मुज़क्कर मुज़क्कर पर सवार होगा।
24- औरतें औरतों को काफ़ी समझेगीं।
25- फ़ोक़ारा के माल को दूसरे लोग ख़ायेगें।
26- सदक़ा देने को नुक़सान ख़्याल किया जायेगा।
27- शरीर लोगों की ज़बानों से लोग डरेगें।
28- सुफ़यानी शाम से ख़ुरूज़ करेगा।
29- मक्के व मदीने के दरमियान मक़ामे बैदा में तबाही वाक़े होगी।
रुक्न व मक़ाम के दरमियान आले मुहम्मद का एक जवान क़त्ल किया जायेगा। और आसमान से निदा देने वाला निदा देगा कि हक़(महदी) और उनके चाहने वालो के साथ है और जब महदी ज़हूर करेगें तो अपनी पुश्त को काबा से टेक लगाये हुए होगें। और आप के चाहने वालो में से 313 अफ़राद आपके गिर्द जमा हो जायेगें। सबसे पहले आप इस आयत की तिलावत फ़रमायेगें:

بَقِيَّةُ اللّهِ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ

फिर आप फ़रमायेगें मैं بَقِيَّةُ اللّهِ और उसका ख़लीफ़ा और तुम लोगों पर ख़ुदा की हुज्जत हूँ। जो शख़्स भी आप पर सलाम करेगा इस तरह कहेगा।

السلام علیک یا بقیة الله فی الارض

और जब आपके पास दस हज़ार अफ़राद जमा हो जायेगें तो कोई यहूदी और नसरानी बाक़ी न रहेगा। और न कोई काफ़िर ही बचेगा। और सबके सब आप पर ईमान लायेगें और तसदीक़ करेगें और सिर्फ़ मिल्लते इस्लाम होगी और जो शख़्स भी रूए ज़मीन पर ख़ुदा वंदे आलम के सिवा मअबूद होगा उस पर आसमान से आग नाज़िल होगी और जलायेगी।

मुत्तक़ी हिन्दी ने अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास से रिवायत की है वह बयान करते हैं आपने फ़रमाया: महदी उस वक़्त ज़हूर फ़रमायेंगें जब आफ़ताब से निशानी ज़ाहिर होगी।

मुहम्मद इब्ने अली ने फ़रमाया: हमारे महदी के लिये दो ऐसी निशानीयों का ज़हूर होगा। जिसका ज़मीन व आसमान की ख़िलक़त से पहले कभी ज़हूर न हुआ होगा।

यानी रमज़ानुल मुबारक की पहली रात में माहताब को गहन लगे और आफ़ताब को दरमीयाने माह में गहन लगेगा यह दोनो अम्र ज़मीन व आसमान की ख़िलक़त के बाद से कभी पेश न आये होगें।[1][18]

मुत्तक़ी हिन्दी हनफ़ी, हकम बिन अतबा से रिवायत करते हैं, मैने मुहम्मद बिन अली से कहा, सुना है कि अनक़रीब आपके दरमियान से एक शख़्स ज़ाहिर होगा जो इस उम्मत को अदल व इंसाफ़ से भर देगा। इमाम ने फ़रमाया: अगर दुनिया से सिर्फ़ एक रोज़ भी बाक़ी रह जायेगा ख़ुदा वंदे आलम उस रोज़ को इस क़दर तूलानी कर देगा यहाँ तक कि वही सब होगा जो इस उम्मत की ख़्वाहिश होगी लेकिन इससे क़ब्ल शदीदतरीन फ़ितने वुजूद में आयेंगें, लोग रात के वक़्त हालत इतमीनान में गुज़ारेगें, और सुबह हालते कुफ़्र में। पस तुम में से जिस को भी यह हालात पेश आये उसे अपने परवरदिगार से डरना चाहिये। और अपने अपने घरों में रहना चाहिये।[2][19]

हाफ़िज़ क़ंदूज़ी की किताब यनाबीऊल मवद्दत में इस आयते करीमा وَاسْتَمِعْ يَوْمَ يُنَادِ الْمُنَادِ مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ ......[3][20] और कान लगाकर सुन रखो कि दिन पुकारने वाला नज़दीक ही की जगह से आवाज़ देगा जिस दिन लोग एक सख़्त चीज़ को बख़ूबी सुन लेगें वही ख़ुरूज का दिन होगा। आयते करीमा के बारे में इमाम सादिक़(अ) ने फ़रमाया मुनादिए क़ायम और उनके वालिद के नाम से निदा करेगा और आयते मज़कूरा में निदा से निदाए आसमानी मुराद है और उसी रोज़ इमाम महदी(अ) ज़हूर फ़रमायेगें।

रिवायत की गयी है कि जिस वक़्त इमाम महदी(अ) ज़हूर फ़रमायेगें, तो बुलंदी से एक मलक इस तरह आवाज़ देगा: यह ख़लीफ़ा ए ख़ुदा महदी(अ) है पस तुम लोग उसकी पैरवी करो।

अबी अब्दिल्लाहिल हुसैन इब्ने अली(अ) से रिवायत की गयी है, आपने फ़रमाया कि जिस वक़्त तुम आसमान की निशानी देखो यानी मशरिक़ की जानिब से अज़ीम आग बुलंद होते हुए देखो जबकि चंद रातें बाक़ी रहेगीं वह वक़्त आले मुहम्मद(अ) और लोगों की आसानी का वक़्त होगा।

यनाबीऊल मवद्दत में अल्लाह के इस क़ौल: अगर हम चाहें तो उन लोगों पर आसमान से आयत का नुज़ूल हो।

इस आयत के बारे में अबू बसीर और इब्ने जारूद के वास्ते से इमाम बाक़िर(अ) से रिवायत की गयी है इमाम ने फ़रमाया: यह आयत क़ायम के बारे में नाज़िल हुई है। एक मुनादी आसमान से क़ायम(अ) और आपके वालिद के नाम की निदा करेगा।

कंजी अलबयान में अब्दुल्लाह इब्ने उमर से रिवायत बयान की गयी है वह करता हैं आँ हज़रत(स) ने फ़रमाया: जिस वक़्त महदी ज़हूर करेगा उनके सर पर अब्र होगा जिससे निदा करने वाला निदा करेगा यह ख़ुदा का ख़लीफ़ा महदी(अ) है. पस तुम लोग उसका इत्तेबा करो।

बुरहान और अक़्दुद दोरर में बयान किया गया है कि यह निदा तमाम अहले ज़मीन के लिये आम होगी। जिसको हर शख़्स अपनी अपनी ज़बान और लुग़त में सुनेगा।[4][21]

इमाम महदी की अलामते ज़हूर के बारे में अबू नईम ने हज़रत अली(अ) से रिवायत की है आपने फ़रमाया: महदी का ज़हूर उसी वक़्त होगा जबकि दुनिया का एक तिहाई हिस्सा क़त्ल हो जायेगा एक तिहाई दुनिया मर जाये और एक बाक़ी रहेगी।

सुफ़यानी यनाबीऊल मवद्दत में हुज्जत के वास्ते से अली से अल्लाह ताला के इस क़ौल

ولو تری اذ فزعوا فلا فوت.

के बारे में रिवायत की गयी हज़रत नें फ़रमाया: हमारे क़ायम का ज़हूर से क़ब्ल सुफ़यानी ख़ुरूज करेगा जो एक औरत के हम्ल के बराबर मुद्दत(9 माह) हुकुमत करेगा इसका लश्कर मदीने आयेगा और जैसे ही मक़ामे बैदा पहुचेगा ख़ुदा उसको बर्बाद कर देगा।[5][22]

इमाम महदी(अ) के ज़हूर के अलामात से मुतअल्लिक़ अमीरूल मोमीनीन अली(अ) से रिवायत की गयी हज़रत ने फ़रमाया: सुफ़यानी ख़ालिद इब्ने यज़ीद इब्ने अबी सुफ़यान की औलाद से होगा जिसका पेट बड़ा और चेहरे पर चेचक के निशान और आँख में सफ़ेद दाग़ होगा। दमिश्क़ से ख़ुरूज करेगा औरतों के शिकमों को चाक कर के बच्चो को भी क़त्ल कर डालेगा और मेरे अहले बैत से एक शख़्स काबे में ज़हूर करेगा जिसके साथ ख़ुदाई लश्कर होगा जो सुफ़ायान के लश्कर को शिकस्त देगा। बस सुफ़यान अपने लश्कर के साथ वापस जायेगा जैसे ही उसका लश्कर मक़ामे बैदा में पहुचेगा तबाह हो जायेगा और कोई एक भी बाक़ी नही बच सकेगा।

पाँच अलामतें

महदी(अ.) के ज़हूर के बारे में अबू अब्दिल्लाह हुसैन इब्ने अली(अ.) से रिवायत की गयी, इमाम ने फ़रमाया: महदी के ज़हूर की पाँच अलामतें हैं:

1- सुफ़यानी का ख़ुरुज

2- यमानी

3- आसमान से आवाज़ आना।

4- मक़ामे बैदा में तबाही।

5- नफ़्से ज़किय्या का क़त्ल होना।[6][23]

यनाबीउल मवद्दत में क़ंदूज़ी ने अबू अमामा से रिवायत की वह बयान करता है कि आँ हज़रत(स) ने हमसे ख़िताब करते हुए दज्जाल का तज़किरा किया और फ़रमाया: मदीने से गंदगी को इस तरह दूर करेगा जिस तरह माद्दा लोहे की खोट को दूर करता है। पस उम्मे शरीक ने रसूलल्लाह(स) से अर्ज़ की या रसूलल्लाह उस रोज अरब कहाँ होगें¿ आपने इरशाद फ़रमाया: उस रोज़ अरब बहुत कम होगें, और सबके सब बैतुल मुक़द्दस में होगें। और उनका इमाम महदी(अ) होगा।

आख़री ज़माने में इमाम महदी की अलामत के बारे में अबी जाफ़र से रिवायत की गयी इमाम ने फ़रमाया: इमाम महदी रोज़े आशूरा ज़हूर फरमायेगें और यह वहीरोज़ है जिस दिन इमाम हुसैन(अ) शहीद हुए, दसवीं मुहर्रम थी और हफ़्ते का दिन था, महदी रुक्न व मक़ाम के दरमियान खड़े होगें दाहिनी जानिब जिबरईल(अ) और बाँये जानिब मीकाईल होगें। ज़मीन के हर गोशे से आपके शिया बैअत के लिये जमा हो जायेगें। आपके शियों के लिये ज़मीन सिमट जायेगी। आप ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगें जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

महदी(अ)के शियों के लिये ज़मीन की तनाबें सिमट जायेंगी। क़ुदरते ख़ुदा से ज़मीन के गोशे गोशे से लोग चंद लम्हात के अंदर मक्के में जमा हो जायेगें।[7][24]

हाकिम नेशापुरी की मुस्तदरक अलस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी बयान करते हैं रसूलल्लाह(स) ने इरशाद फऱमाया: मेरी उम्म्त के आख़री(ज़माने) में महदी ज़हूर करेगा। ख़ुदा वंदे आलम उसको बारिशों से सैराब फ़रमायेगा। और ज़मीन अपने नबातात को ज़ाहिर कर देगी, अमवाल की सहीह तक़सीम करेगा, जानवरों की कसरत होगी और उम्मते इस्लामिया साहिबे अज़मत होगी।

हाकिम नेशापुरी की मुस्तदरक अलस सहीहैन में पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत की गयी है, हज़रत ने फ़रमाया: मेरी उम्मत से महदी होगा, (जिस की हुकुमत) कम अज़ सात(साल) वर्ना नौ(साल) होगी। उसके ज़माने में मेरी उम्मत पर इस क़दर नेमतें नाज़िल होगीं जिस से कब्ल इस तरह नेमतों का नुज़ूल न हुआ होगा। ज़मीन खाने की तमाम चीज़ें अता करेगी जिसकी लोगों से ज़ख़ीरा अंदोज़ी न की जायेगी। उस रोज़ माल जमा होगा एक शख़्स खड़ा होगा और कहेगा इस माल को ले लो।

यनाबीउल मवद्दत में अबी ख़ालिद अलकाहिल ने इमाम जाफ़र सादिक़(अ) से अल्लाह तआला के इस क़ौल

فَاسْتَبِقُواْ الْخَيْرَاتِ أَيْنَ مَا تَكُونُواْ يَأْتِ بِكُمُ اللّهُ جَمِيعًا

(पस नेकीयों में जल्दी करो, तुम जहाँ भी होगे अल्लाह तुम सब को ले आयेगा।) की रिवायत की गयी है आपने फ़रमाया: आयत से क़ायम(अ) के असहाब मुराद हैं। जिनकी तादाद 313 होगी। ख़ुदा की क़सम उम्मते मअदूदह से यही लोग मुराद हैं यह सब लोग मौसमे ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश की तरह एक लम्हे में जमा हो जायेगें।

यनाबीउल मवद्दत में अल्लाह के इस क़ौल

ولئن اخرنا عنهم العزاب الی امةمعدودة

के बारे में रिवायत बयान की गयी रावी बयान करता है उम्मते मअदूदह से महदी के असहाब मुराद हैं जो आख़री ज़माने में होगें जिनकी तादाद 313 होगी। जिस तरह बद्र में रसूलल्लाह (स) के असहाब की तादाद 313 थी। सबके सब एक लम्हे में ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश की तरह जमा हो जायेगें।

तारिख़े इब्ने असाकर (शाफ़ेई) में इस तरह रिवायत की गयी है जिस वक़्त क़ायमें आले मुहम्मद(अ) ज़हूर फ़रमायेगें पस ख़ुदा वंदे आलम मशरिक़ व मग़रिब वालों को इस तरह जमा फ़रमायेगा जिस तरह मौसमे ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश होती है। चुनाँचे महदी के रोफ़क़ा अहले कूफ़ा से और अबदाल अहले शाम से होगें।[8][25]

यनाबीऊल मवद्दत में अल्लाह तआला के इस क़ौल

اعلموا ان الله یحی الارض بعد موتها

समझ लो कि ख़ुदा ज़मीन को ज़िन्दा करता है बाद इसके कि उसकी मौत वाक़े हो चुकी हो।, के बारे में सलाम बिन मुसतनीर के वास्ते से इमाम बाक़िर(अ) से रिवायत की गयी, इमाम ने फ़रमाया: (ख़ुदावंदे आलम) क़ायम के सबब ज़मीन को ज़िन्दा फ़रमायेगा जो कि ज़ुल्म के सबब से मुर्दा हो चुकी होगी और आप अपने अदल के ज़रीये उसको ज़िन्दा फ़रमायेगें।

यनाबीऊल मवद्दत में अल्लाह तआला के इस क़ौल

وَإِن مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلاَّ لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا

और अहले किताब में यक़ीनन उस पर ईमान लायेगें अपनी मौत से क़ब्ल और क़ियामत के दिन उन पर गवाह होगा।

(सूरह निसा आयत 159)

रावी बयान करता है क़ियामत से क़ब्ल ईसा(अ) नाज़िल होगें, उस वक़्त यहूदी और ग़ैर यहूदी कोई बाक़ी न रहेगा मगर सबके सब अपने इन्तेक़ाल से क़ब्ल(महदी) पर ईमान ले आयेगें। और ईसा(अ) इमाम महदी(अ) की इमामत में नमाज़ अदा करेगें।

तज़किरातुल ख़वास में सिब्ते इब्ने जौज़ी(अलहनफ़ी) बयान करता है कि सदयी बयान करता है कि महदी(अ) और ईसा(अ)(एक मक़ाम पर) जमा होगें। पस जब नमाज़ का वक़्त होगा, इमाम ईसा से फ़रमायेगें आप नमाज़ पढ़ायें लेकिन ईसा फ़रमायेंगें आप नमाज़ के लिये ज़्यादा बेहतर हैं पस ईसा इमाम महदी के साथ मामूम की हैसियत से नमाज़ पढ़ेंगें।

 

इमाम का क़िताल हक़ पर होगा।

सही मुस्लिम में जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह अंसारी बयान करते हैं कि मैंने आँ हज़रत (स) को फ़रमाते सुना: मेरी उम्मत का एक गिरोह इज़हारे हक़ के लिये क़ियामत तक जंग करता रहेगा, पस ईसा(अ) तशरीफ़ लायेगें उनका हाकिम ईसा से कहेगा आईये हमें नमाज़ पढ़ाईये वह कहेंगें तुम में बअज़ बअज़ पर इस उम्मत की अता करदा बुज़ुर्गी के सबब हाकिम है।[9][26]

असआफ़ूर राग़ेबीन में सबान(अलहनफ़ी) बयान करता है कि बअज़ रिवायत में वारिद हुआ है कि इमाम के ज़हूर के वक़्त बुलंदी से एक फ़रिश्ता इस तरह आवाज़ देगा यह महदी ख़ुदा की ख़लीफ़ा है, पस तुम लोग इसकी पैरवी करो।

लोगों के दिलों में आपकी मुहब्बत भर जायेगी। मशरिक़ व मग़रिब की हुकुमत आपके हाथों में होगी। रुक्न और मक़ामे इब्राहीम के दरमियान आपसे बैअक करने वालों की तादाद अहले बद्र(313) के बराबर होगी। फिर आपकी ख़िदमत में शाम के अबदाल हाज़िर होगें। ख़ुदावंदे आलम आपकी हिमायत में ख़ुरासान से लश्कर रवाना फ़रमाएगा जिनके परचम स्याह होगें, फिर आप शाम की जानिब मुतवज्जेह होगें और दूसरी रिवायत में है कि आप कूफ़े की जानिब मुतवज्जेह होगें। ख़ुदावंदे आलम आपकी नुसरत तीन हज़ार फ़रिश्तों से फ़रमाएगा। और असहाबे कहफ़ आपके मददगार होगें।

सुयूती का बयान है कि असहाबे कहफ़ के इस मुद्दत तक ताख़ीर करने की वजह यही है कि वह इस उम्मत में दाख़िल हों और ख़लीफ़ा ए हक़ से मुलाक़ात करें। और इमाम के लश्कर के आगे क़बीला ए तमीम का एक शख़्स होगा, जिसकी दाढ़ी ख़फ़ीफ़ होगी और नाम शुऐब इब्ने सालेह होगा जिबरईल आपके लश्कर के सामने और मीकाईल पुश्त पर होगें। सुफ़यानी अपने लश्कर के साथ ख़ुरूज करेगा। और मक़ामे बैदा में पहुच कर बर्बाद हो जायेगा। जिनमें से मुख़्बिर के सिवा कोई और न बचेगा। कामयाबी महदी(अ) की होगी और सुफ़यानी को क़त्ल कर दिया जायेगा।

असआफ़ुर राग़ेबीन में महदी(अ) के बअज़ आसार के बारे में इस तरह बयान किया गया है:

· आपका ज़ुहूर ताक़ सालों में होगा।

· आपकी हुकुमत मग़रिब व मशरिक़ पर मुहीत होगी।

· आपके लिये ख़ज़ाने ज़ाहिर होगें।

· ज़मीन में किसी क़िस्म की तबाहकारी न होगी।

मुन्तख़बे कंज़ुल उम्माल में अली(अ) से रिवायत की गयी है, आपने फ़रमाया: तालेक़ान के लिये मुबारकबाद है। इसलिये कि तालेक़ान में ख़ुदावंदे आलम के खज़ाने हैं जिनका तअल्लुक़ न सोने से है न चाँदी से, बल्कि उसमें ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हे ख़ुदावंदे आलम की कामिल मारेफ़त हासिल है। और वह लोग इमाम महदी(अ) के अंसार होगें।

महदी (अ) रुक्ने शदीद हैं

यनाबीउल मवद्दत में महज्जह की किताब से इस तरह रिवायत की गई है रावी बयान करता है कि हज़रत लूत अपनी क़ौम से इस क़ौल का मतलब

لَوْ أَنَّ لِي بِكُمْ قُوَّةً أَوْ آوِي إِلَى رُكْنٍ شَدِيدٍ

(सूरह हूद आयत 80)

इसके अलावा कुछ और नही था कि उन्होने महदी की क़ुव्वत और आपके अंसार की शुजाअत की तमन्ना की थी और यही लोग रुक्ने शदीद हैं। क़ायम के असहाब से एक मर्द की ताक़त चालीस लोगों के बराबर होगी और उनके मर्दों का दिल फ़ौलाद से ज़्यादा सख़्त होगा। पहाड़ों से गुज़रेगें, पहाड़ टुकड़े टुकड़े हो जायेगा। और वह अपनी तलवारों को उस वक़्त तक म्यान में नही रखेगें जब तक कि ख़ुदावंदे आलम राज़ी न हो जाये।

यनाबीउल मवद्दत में हाफ़िज़ अलकंदूज़ी अलहन्फ़ी, अबू जाफ़र(अ) से रिवायत करते हैं कि इमाम ने फ़रमाया: कि ख़ुदावंदे आलम हमारे चाहने वालों के दिलों में रोअब पैदा कर देगा लेकिन जब हमारा क़ायम ज़हूर करेगा उस वक़्त हमारे चाहने वाले शेर से ज़्यादा बहादुर होगें और तलवारों से गुज़र जायेगें।

सबान ने असआफ़ुर राग़ेबीन में महदी(अ) के ज़हूर से मुतअल्लिक़ बअज़ आसार का तज़किरा इस तरह किया: आपका ज़हूर ताक़ सालों मसलन एक या तीन, पाँच या सात में होगा। मक्के में आपकी बैअत करने के बाद आपका लश्कर कूफ़े की जानिब रवाना होगा। उसके बाद मुख़्तलिफ़ शहरों में तीतर बीतर हो जायेगा।

यनाबीउल मवद्दत में अल्लाह के इस क़ौल

یا یها الذین آمنوا اصبروا و صابروا و رابطوا

की तफ़सीर इस तरह की गई है:

اصبروا و صابروا यानी अपने दुश्मन की अज़ीय्यत पर सब्र करो,

و رابطوا और अपने इमाम महदी(अ) से वाबस्ता रहो।

(सलमा शाफ़ेई) अक़्दुद दुरर में अबी अब्दिल्लाहिल हुसैन इब्ने अली(अ) से रिवायत करता है, आपने इरशाद फ़रमाया: जब मशरिक़ का जानिब में तीन रोज़ या सात रोज़ आग देखो पस समझ लेना कि वही आले मुहम्मद (अ) के ज़हूर का ज़माना है। इन्शाँ अल्लाह।

फिर एक मुनादी आसमान से महदी के नाम से नेदा करेगा जिसको मशरिक़ व मग़रिब के तमाम लोग सुनेगें। यहाँ तक कि गहरी नींद और नीम बेदारी की हालत में सोने वाले भी उस आवाज़ को सुन लेगें। गहरी नींद में सोने वाला आवाज़ सुनते ही बेदार हो जायेगा और नीम ख़्वाबी में मुब्तला शख़्स उठकर बैठ जायेगा और बैठा हुआ खड़ा हो जायेगा और दौड़ पड़ेगा। ख़ुदा वंदे आलम उस आवाज़ को सुनकर जवाब देने पर अपनी रहमत नाज़िल फ़रमाएगा क्यो कि यह आवाज़ रुहुल अमीन जिबरईल (अ) की होगी।

महदी (अ) की हुकूमत पाँचवी होगी

इब्ने हजर शाफ़ेई की सवाएक़े मोहरेक़ा में अबिल क़ासिम तबरानी के वास्ते से आँ हज़रत(स) से रिवायत करता है आँ हज़रत ने फ़रमाया: मेरे बाद अंक़रीब मेरे ख़ुलाफ़ा होगें, फिर उमारा होगें फिर मुलूक होगें, फिर जबाबेरह (यानी ज़ालिम बादशाह होगें) फिर मेरे अहले बैत से एक शख़्स ज़हूर करेगा जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।[10][27]

दज्जाल के मअना

सलमा की अक़दुद दुरर में अबी अब्बास अहमद इब्ने यहिया इब्ने तग़लिब से इस तरह बयान किया गया अबुल अब्बास बयान करता है दज्जाल का नाम उसके धोके और फ़रेबकारी की वजह से है। मसलन

و جلت العبیر اذا طلبة بالفطران

यानी जब ऊंट की मालिश रोग़नी माद्दे से करते हो, उस वक़्त इस जुमले का इस्तेमाल[11][28] करते हैं।

इब्ने सबाग़(अलमालिकी) की फ़ुसुलुल मुहिम्मा में अबी जाफ़र से रिवायत की जिसमें आपने फ़रमाया: जिस वक़्त ज़हूर करेगें कूफ़े की जानिब रवाना होगें वहाँ मसाजिद को वसीअ और रास्तों में निकले हुए परनालों को बंद कर देगें। कोई बिदअत ऐसी होगी मगर आप उसका क़िला क़मअ फ़रमायेगें और कोई भी सुन्नत ऐसी बाक़ी न रह जायेगी मगर उसको क़ायम फ़रमायेगें, क़ुस्तुन्तुन्या, चीन और दैलम के पहाड़ों को फ़तह करेगें।[12][29]

यनाबीउल मवद्दत में हाफ़िज़ क़ंदूज़ी(अलहनफ़ी) ने अमीरुल मोमेनीन अली इब्ने अबी तालिब(अ) से रिवायत की, अमीरुल मोमेनीन फ़रमाते हैं: आँ हज़रत(स) ने फ़रमाया: अफ़ज़ल तरीन इबादत क़शाइश का इन्तेज़ार है।

मुअल्लिफ़े किताब हाफ़िज़ अलक़ंदूज़ी बयान करते हैं हदीस से महदी(अ) के ज़हूर की कशाकश मुराद है।[13][30]

महदी का ज़िक्र तमाम किताबों में मौजूद है

सलमा की अक़दुद दुरर में उमर बिन मुक़री की सुनन से और हाफ़िज़ नईम बिन हम्माद ने राहिबों की किताब से इस तरह रिवायत की है, वह बयान करता है: मैंने महदी का तज़किरा अम्बिया की कुतुब में देखा है, आपके हुक्म में किसी क़िस्म का ज़ुल्म और तशद्दुद नही है।)[14][31]

सुकून व इतमीनान:

अक़दुद दुरर में हरस बिन मुग़ीरा नज़री से रिवायत की गयी वह बयान करता है मैंने अबी अब्दिल्ला बिन अली से अर्ज़ की आक़ा ए महदी को किस तरह से पहचाना जायेगा? हज़रत ने फ़रमाया:

بالسکینة والوقار

सुकून और इतमीनाने नफ़्स के ज़रीये पहचाना जायेगा।[15][32]

अक़दुद दुरर में ताऊस की सनद से इस तरह रिवायत की गयी: महदी (अ) मज़दूरों की सख़्त निगरानी करेगें, माल की सख़ावत फ़रमायेगें और मिसकीनों पर रहम करेगें।

अक़दुद दुरर में नईम बिन हम्माद के वास्ते से अबी रुमीयतः से इस तरह रिवायत की गयी अबी रुमीयतः बयान करता है कि महदी(अ) मिसकीनों को अमवाल का बेहतरीन हिस्सा अता करेंगें। [16][33]

अक़दुद दुरर में हुसैन बिन अली की सनद से इस तरह रिवायत की गयी जिस वक़्त इमाम महदी (अ) ज़हूर फ़रमायेगें उस वक़्त आपके और अरब व क़ुरैश के दरमियान सिर्फ़ तलवार होगी, और उन लोगों को आपके ज़हूर की जल्दी न होगी।(ख़ुदा बेहतर जानता है)

आपका लिबास बहुत सादा और खाना जौ पर मुन्हसिर और जहा कहीं आप मौजूद होगें मौत आपकी तलवार के साये में होगी।[17][34]

यहूदीयत फ़ना हो जायेगी

अक़दुद दुरर में सुलेमान बिन ईसा की सनद से इस तरह रिवायत की गयी सुलेमान बिन ईसा बयान करता है मुझ से लोगों ने बयान किया कि महदी(अ) के हाथों पर बुहैरा ए तीबरीत से ताबूते सकीना ज़ाहिर होगा। आप उसको बुलंद फ़रमा कर बैतुल मुक़द्दस के सामने रख देगें। यह देख कर यहूदी आप पर ईमान ले आयेगें।

अक़दुद दुरर में इस तरह वारिद हुआ है कि बअज़ रिवायात में बयान किया गया है कि आपका नाम(महदी) इस वजह से क़रार पाया कि आप तौरेत की जानिब हिदायत फ़रमायेगें और उसको मुल्के शाम के पहाड़ो पर बरामद फ़रमायेगें। और यहूदीयों की उसकी जानिब हिदायत करेगें। चुनाँचे उस वक़्त यहूदीयों की एक बड़ी जमाअत इस्लाम क़बूल कर लेगी।

और मदाएनी अपनी किताब सुनन में बयान किया है कि आपकी नाम महदी इस सबब से क़रार पाया कि आप मुल्के शाम की पहाड़ीयों की जानिब लोगों को हिदायत फ़रमायेगें ताकि उससे अहले तौरेत को निकाला जाये तो जिसके ज़रीये आप यहूदीयों पर इतमामे हुज्जत तमाम फ़रमायेगें, चुनाँचे आप के ज़रीये बहुत से यहूदी इस्लाम क़बूल करेगें।

सबान असअफ़ुर राग़ेबीन में इस तरह बयान करता है कि महदी(अ) इनताकिया के ग़ार से ताबूते सकीना और तौरेत की किताबें मुल्के शाम के पहाड़ों से निकालेगें जिसके ज़रीये यहूदीयों पर इतमामे हुज्जत फ़रमायेगें, जिनमें से बहुत से यहूदी इस्लाम क़बूल करेगें।

दुनिया में मसीहीयत बाक़ी न रहेगी

यनाबीउल मवद्दत में हाफ़िज़ कंदूज़ी अबू हुरैरा से रिवायत करते हैं, वह बयान करता है रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया:

ولله لینزلن بمریم حکما عادلا فلیکسرن الصلیب و لیقتلن الخنزیر و الیصعن الجزیة و لیترکن الفلاس فلا سعی الیها ولتذهن الشحنا ء و تلتباغض و التحسد

तर्जुमा व हाशिया: ऐन मुमकिन है कि हदीसे मज़कूरा का तर्जुमा इस तरह हो कि ईसा बिन मरियम नाज़िल होगें। (इसलिये कि हज़रत ईसा की जानिब मंसूब शुदा शरीयत के ज़वाल के बयान में हदीस मज़कूर वारिद है।)

(فلیکسرن الصلیب) ईसा(अ) सलीब को तोड़ डालेगें इस तरह ईसाईयों पर सलीब का बेबुनियाद होना साबित हो जायेगा। और ख़िन्ज़ीर को क़त्ल करेंगें। इसलिये कि ख़िन्ज़ीर इस्लाम में हराम है। और मसीही उसी वक़्त इस्लाम क़बूल करे लेगें और उस रोज़ के बाद ख़िन्ज़ीर का इस्तेमाल नही होगा। इस लिये कि यहूद व नसारा में से कोई भी अपने दीन पर बाक़ी न रहेगा। कनीसा से नाच गाने का सिलसिला ख़त्म हो जायेगा और कोई भी उसकी जानिब मुतवज्जे न होगा और कोई शख़्स किसी दूसरे से बुग़्ज़ व हसद नही करेगा इसलिये कि उस वक़्त तमाम दुनिया(ईमान के) एक ही रास्ते पर गामज़न होगी। जैसा कि क़ुरआने मजीद में ख़ुदा वंदे आलम ने इरशाद फ़रमाया:

لیظهره علی الدین کله

सलमा शाफ़ेई की अक़्दुद दुरर में अली बिन अबीतालिब(अ) की सनद से इस तरह रिवायत की गयी हज़रत ने इरशाद फ़रमाया: महदी(अ) तमाम मुल्कों में अपने अहकाम रवाना फ़रमायेगें। जो लोगों के दरमियान अदल व इंसाफ़ करेगें। आपके दौरे हुकुमत में बकरी और भेड़िया एक चरागाह में खायेगें, बच्चे साँप और बिच्छू से खेलेगें जिनसे ज़रा भी नुक़सान न होगा। एक मुद बोया जायेगा और सात मुद पैदावार होगी।

ज़नाकारी, शराबखोरी और सूदख़ोरी ख़त्म हो जायेगी। लोगों का रुजहान शरीअत, दीन, इबादात, तवाफ़ व जमाअत की तरफ़ होगा। और लोग बहुत ज़्यादा उमरे बजा लायेगें। अमानतदारी का हक़ अदा करेगें। दरख़्तों के भलों में इज़ाफ़ा और बरकतो की ज़्यादती होगी। बुरे लोग ख़त्म हो जायेगें और नेकूकार बाक़ी रहेगें।

इस मक़ाम पर मुनासिब है कि गुज़श्ता जुमलों की किसी हद तक वज़ाहत कर दी जाये ।

रिवायत में वारिद हुआ है कि हज़रत के जम़ाने में भेड़िये और बकरी एक मक़ाम पर चरेगें, हाँलाकि कि बकरी की तबीयत में भेड़िये से ख़ौफ़ खाना है। और भेड़िये की तबीयत में बकरी को फाड़ खाना है, चुनाँचे न तो भेड़िया ही बकरी के साथ रह सकता है और न ही बकरी ही भेड़िये के साथ रह सकती है। क़ाबिले गौर अम्र यह है कि हज़रत महदी(अ) के ज़माने में भेड़िया और बकरी किस तरह से साथ रह सकते हैं?

इसके दो जवाब हैं:

पहला जवाब

भेड़िये का फाड़ खाना उसकी असली फ़ितरत नही है बल्कि आरेज़ी है, जो भूक के सबब या भूक की तवील मुद्दत हो जाने से उस पर आरिज़ होता है और जब उसकी हिर्स व तमअ में इज़ाफ़ा होता है वह फाड़ खाने पर आमादा हो जाता है।

और भेड़िये के मुक़ाबले में बकरी का ख़ौफ़ भी उसके ग़रीज़ा ए असली के सबब नही है बल्कि वह उसकी साबेक़ा मारेफ़त और तजरिबे के सबब उससे ख़ौफ़ करती है।

चुँकि इमाम महदी(अ) के ज़माने में आसमान और ज़मीन की बरकतें बख़ूबी मयस्सर होगीं इस लिये न तो भेड़िया भूका होगा और न बकरी।

दूसरा जवाब

यह अम्र ख़ुदा वंदे आलम के मोजेज़ात से होगा, जिस तरह वह मोजेज़ात अंबीया व अवलिया के बारे में होते रहते हैं।

और यह भी मुमकिन है कि महदी की पाकीज़ा सीरत और आपके ज़माने के लोगों का पाकीज़ा किरदार इस हद तक मोवस्सिर हो कि हैवानात और दरिन्दे भी एक दूसरे पर ज़ुल्म करने से बाज़ आ जायें जैसा कि जदीद ऊलूम ने इस अम्र का इंकेशाफ़ किया है। इसके अलावा दीगर एहतेमालात का भी इमकान है।

मज़कूरा वुजुहात की रौशनी में रिवायत में वारिद दूसरा जुमला यह कि

महदी(अ) के ज़माना ए इमामत में बच्चे साँप और बिच्छुओ से खेलेगें। बख़ूबी समझा जा सकता है।

यानी एक मुद बोया जायेगा और सात सौ मुद उगेगा। रिवायत में वारिद शुदा जुमला दर हक़ीक़त क़ुरआने करीम की इस आयत की जानिब इशारा है:

तर्जमा: जो लोग अपने मालों को ख़ुदा की राह में सर्फ़ करते हैं, उनके सर्फ़ किये हुए मालों की मिसाल उस दाने की सी है जिसने सात बालीयाँ उगाई हों(और) हर बाली में से सौ(सौ) दाने हों और अल्लाह जिसे चाहता है(इसी तरह की ज़्यादती अता फ़रमाता है।)

सूरः ए बक़रः

महदी(अ) के ज़माने में इस क़दर पैदावार होने का सबब बिल्कुल ज़ाहिर है वह यह कि आसमान से मुसलसल बारिश होगी और ज़मीन अपनी तमामतर बरकतों तो ज़ाहिर कर देगी उस वक़्त हर एक किलो ज़राअत करने पर उसकी नतीजा सात सौ किलो पैदावार होना यक़ीनी है।

सवाल: इस तरह की पैदावार क्यो कर मुमकिन है?

जवाब: आज तक किसी वक़्त और किसी भी मक़ाम पर यह अम्र साबित नही हुआ है कि हर दाने से सात बालीयाँ निकली हों। और हर बाली में सौ दाने हों।

पस यह खबर क़ुरआने हकीम ने किस ज़माने से मुतअल्लिक़ दी है?

क्या क़ुरआने मजीद ने किसी ऐसे अम्र की ख़बर दी है जो कभी वुजूद में न आयेगा?

क्या क़ुरआने मजीद कोई ऐसी मिसाल भी पेश करता है जिसकी कोई वाक़ेईयत और हक़ीक़त न हो। हरगिज़ हरगिज़ नही।

पस साबेक़ा मिसाल कब सादिक़ आयेगी?

क़ुरआने हकीम की साबेक़ा मिसाल महदी (अ) के ज़माना ए इमामत में पूरी होगी।

तूलुल आमार

महदी (अ) के ज़माने में लोगों की उमरें तवील होगीं।

सवाल:

उमरें किस लिये तूलानी होगीं?

जवाब:

इसलिये कि कोताह उम्र के असबाब:

1- हिफ़ज़ाने सेहत का फ़िक़दान

2- रंज व ग़म, नफ़सीयाती बीमारीयाँ वग़ैरह हैं।

और जदीद इल्मे तिब ने इस अम्र की वज़ाहतकर दी है कि इंसानी मशीनरी के लिये अगर ऐसे हालात पेश न आयें जो उसको सुस्ती और काहिली की तरफ़ मायल करते हैं तो इंसान के एक तवील मुद्दत तक ज़िन्दा रहने में कोई अम्र मानेअ नही है।

पस जब इमाम महदी के ज़माने में दुनिया और ईमान की नेमतें आम होगीं, उसूले हिफ़ज़ाने सेहत पर अमल होगा और लोगों की ज़िन्दगी सुकून व इतमीनान से गुज़रेगी तो लोग कोताही ए उम्र के अमराज़ में मुब्तला न होगें।

अमानतों की अदाएगी

हज़रत के ज़माने अमानतों की अदाएगी होगी:

हदीस में वारिद हुआ है कि लोग अपने बादशाह के दीन पर होगें।

पस जब उम्मत का इमाम, महदी अलक़ायम (अ) मुजस्समा ए ईमान हो, फ़लाह व बहबूदी की बुनियाद हो, ऐसे इमाम के ज़माने में लोगों को नेक और सालेह होना ही चाहिये। चुनाँचे ऐसे लोग अमानत में ख़यानत हरगिज़ न करेगें। और अमानतदारी और उसकी अदाएगी लोगों के दरमियान आम होगी।

शरीर हलाक होंगे

शरीर लोग हलाक हो जायेगें

शरीर लोगों की दो क़िस्में हैं:

1- वह लोग हैं जिनको किसी तरह की ख़ैर व ख़ूबी और नसीहत से फ़ायदा न होगा। चुँकि यह लोग फ़साद और शक़ावत के मर्कज़ होगें। लिहाज़ा ऐसे लोगों को इमाम क़त्ल फ़रमा देगें।

2- दुसरे वह लोग हैं जिन पर नेक माहौल और ईमानी फ़ज़ा का असर होगा। चुनाँचे महदी (अ) के ज़माना ए इमामत में सालेह और मोमिन बंदे हो जायेगें।

इमाम के परचम के नीचे कोई भी दुशddमन बाक़ी नही रहेगा।

(इमाम(अ) के परचम तले अहले बैत(अ) का कोई भी दुश्मन बाक़ी न रहेगा।)

दुश्मनाने अहले बैत की दो क़िस्में हैं:

1- यह वह लोग हैं जो अहले बैत के हक़ और आपके फ़ज़्ल से जाहिल हैं। ऐसे लोग महदी(अ) के ज़माना ए इमामत में अहले बैत के फ़ज़्ल और हक़ से बख़ूबी वाक़िफ़ हो जायेगें। और आपकी विलायत से दोस्ती और मुहब्बत करेगें।

2- यह लोग ऐसे दुश्मनाने अहले बैत हैं जिनके लिये अमीरुल मोमीनीन हज़रत अली (अ) ने इस तरह से फ़रमाया:

तर्जुमा: यक़ीनन कुछ हमारे दुश्मन ऐसे भी हैं जिनको हम पाक व पाकीज़ा शहद भी खिलाएगें फिर भी उनकी दुश्मनी में इज़ाफ़ा होता रहेगा।

यही वह लोग हैं जिनके वुजूद से ज़मीन को पाक करने के लिये इमाम महदी (अ) उनको क़त्ल करेगें। चुनाँचे इस तरह के दुश्मनाने अहले बैत के वुजूद से दुनिया ख़ाली हो जायेगी।

मज़कूरा नुकात के तहत बहल बहुत तूलानी है और उससे मुतअल्लिक़ बहुत सी मिसालें मौजूद हैं। लेकिन हम इख़्तसार के पेशे नज़र कलाम को तूल देना नही चाहते।

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[1][18]- माहिरे फ़लकीयात के मुताबिक़ नामुमकिनात से हैं कि अव्व्ले माह में माहताब को गहन लगे इसलिये कि यह अम्र महताब की ख़िलक़त से आज तक वुजूद में नही आया और इसी तरह इल्मे फ़लक़ के ऐतबार से नामुमकिन है कि आफ़ताब का गहन महीने के दरमीयान में वाक़े हो, यह अम्र भी आफ़ताब की ख़िलक़त से आज तक वुजूद में नही आया और आफ़ताब का मग़रिब से तुलू करना भी नामुमकिनात में से है, इस तरह निज़ामे शम्सी में ख़लल वाक़े होगा। और यह भी नामुमकिन है, लेकिन जो ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है उन तमाम उमूर को अपने वली(मेहदी) के ज़हूर के वक़्त अंजाम देगा।

चाँद और सूरज के गहन की ख़बर मौजूदा रिवायत से मज़कूर हुई और आफ़ताब के मग़रिब से तुलू होने से मुतअल्लिक़ भी बाज़ रिवायत में वारिद हुआ है।

[2][19]- रिवायत में एक जुमला वारिद हुआ है इस जुमले का इस्तेमाल उस शख़्स के लिये होता है जो अपनी घर नही छोड़ता और यह यहाँ पर इस अम्र से किनाया इस्तेमाल किया गया है कि लोग उन हालात मज़कूरा में दूसरे मज़हब की तरफ़ न जायें, इसके माना यह हरगिज़ नही हैं कि लोग अम्र बिल मारुफ़ और नहयी अज़मुन्कर को तर्क़ कर दें इसलिये कि यह दोनो अम्र वाजिब हैं और उनके तर्क करने से वाजिबात मुअत्तल हो जायेगें।

अलबत्ता मेरा ख़याल यह है कि हदीसे मड़कूर में इस जुमले के माना एक दूसरी हदीस में इस तरह मौजूद हैं लोगों के साथ रहो लेकिन उनमें घुल मिल न जाओ) हदीस का मतलब यह है कि लोगों के दरमीयान अम्र बिल मारुफ़ अंजाम दे सकते हो उस वक़्त तक उनके साथ रहो ताकि इनके अच्छाई का हुक्म दो और बुरी बातों से रोको।

[3][20]- सूरह क़ाफ़ आयत 41-42

[4][21]- हदीस में ज़िक्र शुदा मायनी यानी एक ही आवाज़ का तमाम लोगों को सुनना और समझना। ग़ैब पर ईमान रखने वालों के लिये बहुत ज़्यादा सक़ील है हालाँकि ख़ुदा वंदे आलम की क़ुदरते आम्मा से मुतअल्लिक़ हैं। और आज का दुनिया और माहौल में चीज़ बहुत आसान हो चुकी है कि इंसान ने जब एक ऐसी मशीन ईजाद की जिसको मुख़्तलिफ़ मुमालिक में आम मजालिस में इस्तेमाल किया जाता है जिनमें मुख़्तलिफ़ ज़बानों से तअल्लुक़ रखने वाले लोह मौजूद होते हैं। कलाम करने वाला अरबी में कलाम करता है लेकिन यह मशीन उसी ख़िताब का तर्जुमा फ़ारसी, उर्दू, फ्रांसीसी वग़ैरह ज़बानों में करती है।

इस्लाम मुजस्समा ए मोजिज़ात है और टेक्नालाँजी चाहे जिस क़दर तरक़्क़ी कर जाये लेकिन इस्लाम से निशानीयों और मोजीज़ातत का ज़हूर होता रहेगा।(मुअल्लिफ़)


[5][22]- हदीसे शरीफ़ में पहला इशारा क़त्ल और हादिसात की जानिब है जो आज की दुनिया में हर रोज़ कहीं न कहीं वाक़े हो रहें हैं। कभी को आलमी जंग और कभी ख़ाना जंगी की सूरत में हमारे सामने हैं जिसकी वजह से लाखो जानें जा रही हैं। हदीस में दूसरा इशारा आम अमवात की जानिब है जो कि वबाई अमराज़ भूक और ज़लज़लों के सबब वाक़े होती हैं।

2- बैदा मदीने और मक्के के दरमीयान एक सहरा है जहाँ पर शदीद तरीन ज़लज़ले आयेगें जिसके सबब शाम से आने वाला सुफ़यानी लश्कर तबाह हो जायेगा जिसकी मज़ीद तफ़सील दूसरी हदीस में बयान की जायेगी।

[6][23] - रिवायत में नफ़्से ज़कीय्या से मुराद सैयदे हुसैनी है जो इमाम के ज़हूर से क़ब्ल ख़ुरुज करेगा। लोगों को हक़ का जानिब दावत देगा और इमाम के ज़हूर से क़ब्ल शहीद कर दिया जायेगा। (मुअल्लिफ़)

[7][24] - यह अम्र तअज्जुब ख़ेज़ नही है इसलिये कि ख़ुद क़ुरआने करीम ने जनाबे सुलैमान के वसी आसिफ़ बिन बरख़िया के लिये हज़ारों मील की मसाफ़त वाली ज़मीन की तनाबें सिमट गयीं थीं, और उन्होने एक लम्हे के अंदर फ़लस्तीन से यमन में तख़्ते बिलक़ीस मंगवा लिया था। इरशाद होता है:

قَالَ الَّذِي عِندَهُ عِلْمٌ مِّنَ الْكِتَابِ أَنَا آتِيكَ بِهِ قَبْلَ أَن يَرْتَدَّ إِلَيْكَ طَرْفُكَ فَلَمَّا رَآهُ مُسْتَقِرًّا عِندَهُ

(सूरह नमल आयत 40)

[8][25] - हदीसे मज़कूर में मशरिक़ व मग़रिब वालों के जमा होने का मतलब यह है कि तमाम आलम यह देखेगा कि इमाम सारी दुनिया से ज़ुल्म व जौर का बदला ले रहे हैं और जब तमाम दुनिया पर यह रौशन और वाज़ेह हो जायेगा कि निजात आपके दामन से वाबस्ता है और उस वक़्त सारे लोग आप पर ईमान ले आयेगें।

हदीस में रोफ़क़ा ए इमाम से मुमकिन है आपके दरजा ए अव्वल के अंसार मुराद हों और इसी सबब से उन हज़रात को आपके रोफ़क़ा का नाम दिया गया हो।

अबदाल: लफ़्ज़े अबदाल ऐसे मुत्तक़ीन और सालेहीन लोगों से किनाया है जब भी उनमें से कोई ग़ायब होता है या इन्तेक़ाल करता है ख़ुदावंदे आलम उसका बदल दूसरे से शख़्स को क़रार देता है।

रिवायत में शाम जो वारिद हुआ है उससे मुराद मौजूदा शाम नही है बल्कि वह मुल्के शाम है जो सिरिया, लेबनान, फ़लिस्तीन, जार्डन और तर्की के बअज़ हिस्सों पर मुशतमिल है और यह भी मुमकिन है कि अबदाल(जबले आमिल) कि जहाँ पर सदरे इस्लाम से आज तक हक़ की हिमायत की जा रही है और हज़ारों ऊलामा, फ़ोक़ाहा और मुत्तक़ीन वहाँ पर पैदा हुए हैं यहाँ तक कि ऊलामा ए जबल आमिल की बअज़ शख़सियात के बारे में ख़ास कुतुब भी तहरीर फ़रमाई गयी है। जिनमें से बुज़ुर्ग आलिमे दीन शेख मुहम्मद अलहुर्र अलआमिली की किताब(अमलुल अमल फ़ी ऊलामा ए जबलिल आमिल) है, यही ऊलामा मुराद हैं।(मुअल्लिफ़)

[9][26] - हदीसे मज़कूरा इस अम्र पर दलालत करती है कि इमाम मेहदी(अ) के ज़हूर तक ख़ुदा की तरफ़ दावत और दुनिया में हक़ पर जंग जारी रहेगी। औक यही हदीस उस गिरोहे मुसब्बीन के लिये जबाव भी है जिनका कहना है कि दुनिया का कुफ्र व ज़लालत से भर जाना ज़रूरी है ताकि इमाम ज़हूर फ़रमायें और हमें कुछ इसलाह नही करना चाहिये व गर्ना अमल इमाम के ज़हूर में ताख़ीर का बाईस होगा। इस क़िस्म का ख़्याल क़ायम करना कई वुजूह से ग़लत है, जिनमे से बअज़ का ज़िक्र हम कर चुके हैं।(मुअल्लिफ़)

[10][27] - इमाम मेहदी(अ) के ज़हूर से क़ब्ल चार क़िस्म के लोग हुकुमत करेंगें:

1. ख़ुलाफ़ा- यह लोग पैग़म्बरे इस्लाम(स) की ख़िलाफ़त के मुद्दई हैं।

2. उमारा- यह लोग ख़िलाफ़त के मुद्दई नही होगें, अलबत्ता लोगों की इसलाह के लिये अमारत(यानी हुकुमत) के मुद्दई होगें।

3. मुलूक- यह लोग न तो ख़िलाफ़त का दावा करेगें और न अमारत का, अलबत्ता ग़ुलामों और अमवाल पर हुकुमत करेगें।

4. जबाबेरह- यह लोग ज़ुल्म व जौर के अलावा और कुछ अंजाम न देगें।

मज़कूरा तमाम हुकुमतों के बाद इमाम मेहदी(अ) हक़ और ख़ैर व सलामती के साथ ज़ाहिर हो कर हुकुमत फ़रमायेगें।(मुअल्लिफ़)

[11][28] - दज्ल: हर उस चीड़ को कहते हैं जो झूट और बेहक़ीक़त हो, मसलन इस्तेमाल किया जाता है दज्लुस सैफ़ यानी तलवार पर इस तरह ज़ंग चढ़ जाना कि वह लोगों को फ़ौलाद नज़र न आये या बेहतरीन क़िस्म का लोहा महसूस हो इसी तरह दज्जाल उस शख़्स को कहते हैं जिससे झूट और फ़रेबकारी के अलावा और कुछ ज़ाहिर न हो।(मुअल्लिफ़)

[12][29] - जिस हुकुमत की तासीस इमाम मेहदी(अ) फ़रमायेगें वह तहज़ीब व तमद्दुन के ऐतबार से आला तरीन हुकुमत होगी। तमद्दुन की मुतअद्दिद अनवाए हैं। मसलन इमाम मसाजिद में वुसएत फ़रमायेगें, ताकि तमाम दुनिया परचमे इस्लाम व ईमान के तहत दाख़िल हो जाये। मसलन रास्तों में निकले हुए परनालों को बंद करेगें ताकि गुज़रने वालों को किसी क़िस्म की ज़हमत न हो, और वसाइल के नक़्ल में किसी क़िस्म की दुशवारी पेश न आये, शहरों को हुस्न व जमाल बख़्शेगें। क़ुस्तुन्तुन्या(जो कि ईसाईयों का मर्क़ज़ है।) उसको फ़तह फ़रमायेगें। चीन, बौध और कुफ़्र व इलहाद का मर्क़ज़ है उसको भी फ़तह फ़रमायेगें। दैलम, यहूदीयों और उन जैसे दूसरे दीगर लोगों का मर्कज़ है इसी तरह उसको भी आप ही फ़तह फ़रमायेगें। इस तरह तमाम दुनिया फ़िकरी, अमली, सियासी और अख़लाक़ी तरक़्क़ीयों के साथ मेहदी(अ) के परचम तले जमा हो जायेगें।(मुअल्लिफ़)

[13][30] - मेहदी(अ) के ज़ुहूर के सबब इसलाह का इंतेज़ार करने में रुहानी और अमली दो बड़े फ़ायदे हैं।

रुहानी फ़ायदा: रुही फ़ायदा इस तरह है जब हम मेहदी का इंतेज़ार करेगें तो उनसे मुहब्बत व मुरव्वत में इज़ाफ़ा होगा। जो मुहब्बत खुदा वंदे आलम की जानिब से इमाम की निस्बत लोगों पर वाजिब क़रार दी गयी है। (ऐ रसूल(उन लोगों से) कह दो कि मैं तुम से अपनी तबलीग़ें रिसालत की उजरत अपने अहले बैत की मवद्दत के अलावा कुछ नही चाहता।) इसी तरह उसके अलावा दीगर रुहानी फ़वाइद भी मुज़मर हैं।

अमली फ़ायदा:

[14][31] - असफ़ार, सफ़र की जमा है, जिसके मायना बड़ी किताब के हैं। यानी मेहदी का ज़िक्र अंबीया पर नाजिल शुदा कुतुब में मौजूद है।

कलमा ए(असफ़ारुल अँबीया) के मायना हैं कि रिवायत में तमाम अंबीया की कुतुब मुराद हैं, इसलिये कि मज़कूरा कलमा जमा है और मुज़ाफ़ भी है जो उमूम का फ़ायदा देता है, जैसा कि इल्मे अदब में मौजूद है।

(मुअल्लिफ़)

[15][32] - سکینة के मायना इतमीनाने क़लबी और बातेनी सुकून के हैं।

الوقار ज़ाहिरी इतमीनान को कहते हैं जिसका इज़हार आज़ा के ज़रीये होता है, यानी इमाम मेहदी का क़ल्ब सुकून और इतमीनान से भरा होगा और आज़ा व जवारेह से जलालत व वक़ार का इज़हार हो रहा होगा। चुनाँचे आप ख़ुदा वंदे आलम के हुज़ूर में ख़ुज़ू व ख़ुशू की हालत में होगें और मज़कूरा तमाम हालात ईमान के ताबे हैं।(मुअल्लिफ़)

[16][33] - तमाम दुनिया में जहाँ कहीं मसावात का नारा बुलंद किया जाता है वहाँ पर दौलतमंदों को फ़कीर बनाने की कोशिश और उनसे फ़ुक़रा के नाम पर माल हासिल किया जाता है(लेकिन उनके दरमीयान सही तक़सीम नही हुई। आज की दुनिया में फ़क़ीरी पर मसावात क़ायम का जाती है लेकिन इमाम मालदार के सबब मसावात फ़रमायेगें और मिसकीन को माल का बेहतरीन हिस्सा अता करेगें। पस तुम आसमानी निज़ाम और इंसानी निज़ाम पर ग़ौर करो कि दोनो में कितना फ़र्क़ है।)
(मुअल्लिफ़)
[17][34] - मेहदी(अ)और अरब व कुरैश के दरमीयान तलवार और जंग का मतलब यह है कि अरब के बअज़ लोग तकब्बुर के सबब आपसे मुक़ाबला करेगें, क़िताल करेगें और आप भी क़िताल करेंगें । मेहदी(अ) की ग़ेज़ा अपने बक़ीया अजदाद की मानिन्द जौ की रोटी होगी। और आपको मौत का ज़रा भी ख़ौफ़ दामनगीर न होगा। लिहाज़ा आपकी तलवार ख़ुदा की राह में बुलंद रहेगी। आप अपने एक हाथ से क़ुरआन की ततबीक़ और दूसरे हाथ से तलवार लेकर क़ुरआन की हिफ़ाज़त फ़रमायेगें।
(मुअल्लिफ़)