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2011-07-17

हज़रत इमाम महदी (अ. स.) के मोजज़ें और करामतें

हज़रत इमाम महदी (अ. स.) की ज़िन्दगी का एक हिस्सा, उनके बचपन का ज़माना है जिस में उनके ज़रिये बहुत से मोजज़ें और करामतें देखने को मिलीं हैं, जब कि अल्लाह की इस आख़री हुज्जत की ज़िन्दगी का यह हिस्सा

हमारी ग़फ़लत का शिकार हुआ है। हम यहाँ पर उनकी करामतों में से सिर्फ़ एक नमूना पेश कर रहे हैं।
इब्राहीम इब्ने अहमद निशा पूरी कहते हैं कि :
जिस वक़्त अम्र बिन औफ़ ने (वह एक ज़ालिम और सितमगर बादशाह था और उसे शियों को क़त्ल करने का बहुत ज़्यादा शौक़ था) मुझे क़त्ल करने का इरादा किया, उस वक़्त मैं बहुत ज़्यादा डरा हुआ था। मेरा पूरा जिस्म डर से काँप रहा था। मैं अपने दोस्तों और परिवार वालों से ख़ुदा हाफ़िज़ी कर के हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) के घर की तरफ़ रवाना हुआ ताकि उन से भी ख़ुदा हाफिज़ी कर लूँ। मेरा इरादा था कि हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) से मुलाक़ात के बाद कहीँ भाग जाऊँगा। जब मैं हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) के मकान पर पहुँचा तो हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) के पास एक बच्चे को देखा उसका चेहरा चौदहवीं रात के चाँद की तरह चमक रहा था। मैं उस का नूर देख कर हैरान रह गया, और क़रीब था कि अपने इरादे (क़त्ल के डर से भागने का इरादा) को भूल जाऊँ।
उस मौक़े पर उस बच्चे ने मुझ से कहा कि ऐ इब्राहीम भागने की ज़रूरत नही है। अल्लाह बहुत जल्दी तुम्हें उसके ज़ुल्म से बचा लेगा।
यह सुन कर मेरी हैरानी और बढ़ गई, मैं ने हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) से कहा :  मैं आप पर कुर्बान ये बच्चा कौन है, जो मेरे इरादों से जानता है ?  हज़रत इमाम अस्करी (अ. स.) ने फ़रमाया : ये मेरा बेटा है और मेरे बाद मेरा जानशीन है।
इब्राहीम कहते हैं कि : मैं हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) के मकान से इस हालत में बाहर निकला कि मुझे ख़ुदा के लुत्फ़  व करम की उम्मीदवार थी और मैं ने जो बारहवें इमाम (अ. स.) से सुना था उस पर यक़ीन रखता था। अतः कुछ दिनों के बाद ही मेरे चचा ने मुझे अम्र बिन औफ़ के क़त्ल होने की खुश खबरी दी...[1]सवालोंकेजवाब
 

आसमाने इमामत के आख़री रौशन सितारे हज़रत इमाम महदी (अ. स.) अपनी ज़िन्दगी के शुरू से शियों को उनके सवालों के सही, ठोस और संतुष्ट करने वाले जवाब देते थे। उनके जवाबों को सुन कर शियों के दिलों में सकून व इत्मिनान पैदा होता था। हम यहाँ पर ऐसे ही सवालों व जवाबों से संबंधित एक रिवायत नमूने को तौर पर लिख रहे हैं।
सअद इब्ने अब्दुल्लाह क़ुम्मी (यह शियों में एक बहुत बड़ी शख्सीयत थे।), अहमद इब्ने इस्हाक़ क़ुम्मी (यह हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) के वकील थे।) के साथ कुछ सवालों के जवाब मालूम करने के लिए हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) के पास गये, वापस आकर उन्होंने इस मुलाक़ात का विवरण इस तरह बताया :
जब मैं ने सवाल करना चाहा तो हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ. स.) ने अपने बेटे की तरफ़ इशारा करते हुए फरमाया : मेरे इस बेटे से सवाल करो। यह सुन कर बच्चे ने मेरी तरफ़ मुँह करके फरमाया : तुम जो सवाल भी पूछना चाहते हो पूछ सकते हो। मैं ने सवाल किया कुरआन के हुरुफ़ मुकत्तेआत में से ”کھیعص“ का क्या मक़सद है ? इमाम (अ. स.) ने फरमाया : यu हुरुफ़ ग़ैब के मसाइल में से हैं। ख़ुदा वन्दे आलम ने अपने बन्दे और पैग़म्बर जनाब ज़करिया को उनके बारे में बताया और फिर उनके बाद पैग़म्बरे इस्लाम (स.) को दो बारा बताया।
वाक़िया यूं है कि हज़रत ज़करिया (अ. स.) ने ख़ुदा वन्दे आलम से दुआ की कि मुझे पंजतन (आले एबा) के नाम बता दे, ख़ुदा वन्दे आलम ने जनाबे जिब्रईल को नाज़िल किया और उन्होंने उनको पंजतन के नाम बताये। जैसे ही जनाबे ज़करीया ने इन मुकद्दस नामों हज़रत मुहम्मद (स.) हज़रत अली (अ. स.), हज़रत फातिमा (स. अ.) और हज़रत हसन (अ. स.) को अपनी ज़बान से लिया तो उनकी मुशकिलें दूर हो गईं और जब उनकी ज़बान पर हज़रत इमाम हुसैन (अ. स.) का नाम आया तो उनका दिल भर आया और वह चकित हो कर रह गये। उन्होंने एक दिन अल्लाह की बारगाह में दुआ की कि ऐ अल्लाह ! जिस वक़्त मैं इन चार इंसानों के नामों को लेता हूँ तो मेरी परेशानियाँ और मुश्किलें दूर हो जाती हैं और दिल को सकून मिलता है, लेकिन जब मैं हुसैन (अ. स.) का नाम लेता हूँ तो मेरी आँखों से आँसू बहने लगते हैं और मेरे रोने की आवाज़ बुलन्द हो जाती है ! पालने वाले इस की क्या वजह है ?  ख़ुदा वन्दे आलम ने उनको हज़रत इमाम हुसैन (अ. स.) का वाकिया सुनाया और फरमाया : ”کھیعص“        इसी वाकिये की तरफ़ इशारा है। इन हरफ़ों में ”کاف “ से मुराद वाकिया ए करबला, और ”ھا“ से उनके खानदान की हलाकत (शहादत) मुराद है और ”یا“ से यज़ीद के नाम की तरफ़ इशारा है, जो इमाम हुसैन (अ. स.) पर ज़ुल्मो सितम करने वाला है, और ”ع“ से इमाम हसन (अ. स.) की अतश और प्यास मुराद है, और ”صاد“ से हज़रत इमाम हुसैन (अ. स.) का सब्र व मुराद है।
मैं ने सवाल किया : मेरे मौला व आक़ा लोगों को अपने लिए ख़ुद इमाम बनाने से क्यों रोका गया है ?
इमाम (अ. स.) ने फरमाया : इमाम से तुम्हारा अभिप्रायः कौनसा इमाम है, बुराईयाँ फैलाने वाला इमाम या समाज को सुधारने वाला इमाम ? मैं ने कहा : समाज को सुधारने वाला इमाम, इमाम (अ. स.) ने फरमाया :  क्योंकि कोई भी किसी दूसरे के दिल की बातें नहीं जानता हैं कि वह नेकी व भलाई के बारे में सोचता है या बुराई के बारे में, इस सूरत में क्या इस बात की शंका नहीं पाई जाती कि जनता जिसे अपना इमाम चुने वह बुराईयाँ फैलाने वाला हो। मैं ने कहा : जी हाँ इस बात की शंका तो पाई जाती है। मेरे इस जवाब को सुनकर इमाम (अ. स.) ने फरमाया : बस यही वजह है...[2]...[3]
उल्लेखनीय है कि इस रिवायत के अन्त में इमामे ज़माना (अ. स.) ने दूसरे कारणो का भी वर्णन किया हैं और दूसरे सवालों के जवाब भी दिये हैं,संक्षेप की वजह से पूरी रिवायत का उल्लेख नहीं किया है।

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[1]. असबातुल हुदात जिल्द न. 3, फसल 7, पेज न. 190
[2]. कमालुद्दीन, जिल्द न. 2, बाब 43, हदीस 21, पेज न. 190।
[3]. इस बात की व्याख्या किताब के फहले अध्याय में, इमाम के खुदा की तरफ़ से मंसूब होने के शीर्षक के अन्तर्गत उल्लेख हो चुकी है।


इमाम महदी अलैहिस्सलाम के ज़हूर का सन्

अल्लाह ने पाँच चीज़ों का इल्म अपनी ज़ात से मख़सूस किया है। जिनमें से एकक़ियामत भी है। चूँकि इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़हूर क़ियामत के लवाज़ेमात में से है लिहाज़ा आप कब ज़हूर फ़रमायेंगे और ज़हूर की तरीख़ व सन् क्या होंगे ? इसका इल्म भी अल्लाह को ही है। लेकिन मासूमीन की अहादीस में इसके इशारे मौजूद हैं।
अल्लामा शेख़ मुफ़ीद, अल्लामा सैयद अली, अल्लामा तबरसी, अल्लामा शिबलंजी ने यह लिखा है कि इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि आप ताक़ सन् में ज़हूर फ़रमायेंगे। जो 1, 3,5,7 व 9 से मिल कर बनेगा। इसी के साथ आपने फ़रमाया कि आपके इस्मे गिरामी का ऐलान जिब्राईल के ज़रिये 23 तारीख़ को कर दिया जायेगा और आशूर के दिन ज़हूर होगा।
(शरहे इरशादे मुफ़ीद, सफ़ा न. 532 व ग़ायत उल मक़सूद जिल्द न. 1 सफ़ान. 161 व आलाम उल वरा सफ़ा 262 व नूर उल अबसार सफ़ा न. 155)
मेरे नज़दीक ज़िल्हिज्जा की 23 तारीख़ होगी क्योँकि नफ़से ज़किया के क़त्ल और ज़हूर में 15 रातों का फ़ासला होना मुसल्लम है। मुमकिन है कि क़त्ले नफ़से ज़किया के बाद ही नाम का ऐलान कर दिया जाये और ज़हूर बाद में हो।
मुल्ला जवाद साबाती का कहना है कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम 10 मोहर्रम को जुमे के दिन सुबह के वक़्त 7100 हिजरी में ज़हूर फ़रमायेंगे।
(ग़ायत उल मक़सूद सफ़ा 161)
इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम का इरशाद है कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम ज़ोहर के वक़्त ज़हूर फ़रमायेंगे और वल अस्रे इन्ना अल इंसाना लफ़ी ख़ुस्र से यही अस्र मुराद है।
ज़हूर के वक़्त इमाम अलैहिस्सलाम की उम्र
विलादत के दिन से ज़हूर के वक़्त तक आपकी कितनी उम्र होगी ? यह तो ख़ुदा ही जानता है। लेकिन यह मुसल्लेमात से है कि जिस वक़्त आप ज़हूर फ़रमायेंगे हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की मिस्ल आप चालीस साला जवान की हैसियत से होंगे।
(आलाम उल वरा , सफ़ा न. 265 व ग़ायत उल मक़सूद सफ़ा 76)
आपका अलम
हज़रत इमाम महदी के अलम पर अल बैतुल्लाह लिखा होगा और आप अपने हाथ पर अल्लाह के लिए बैअत लेंगे और काएनात में सिर्फ़ दीने इस्लाम का परचम लहरायेगा।
(यनाबि उल मवद्दा, सफ़ा न. 434)

यनाबीउल मवद्दत में क़ंदूज़ी ने अबू अमामा से रिवायत की वह बयान करता है कि आँ हज़रत(स) ने हमसे ख़िताब करते हुए दज्जाल का तज़किरा किया और फ़रमाया: मदीने से गंदगी को इस तरह दूर करेगा जिस तरह माद्दा लोहे की खोट को दूर करता है। पस उम्मे शरीक ने रसूलल्लाह(स) से अर्ज़ की या रसूलल्लाह उस रोज अरब कहाँ होगें

महदी(अ.) के ज़हूर के बारे में अबू अब्दिल्लाह हुसैन इब्ने अली (अ.) से रिवायत की गयी, इमाम ने फ़रमाया: महदी के ज़हूर की पाँच अलामतें हैं:

1-     सुफ़यानी का ख़ुरुज
2-     यमानी
3-     आसमान से आवाज़ आना।
4-     मक़ामे बैदा में तबाही।
5-     नफ़्से ज़किय्या का क़त्ल होना।[23]
यनाबीउल मवद्दत में क़ंदूज़ी ने अबू अमामा से रिवायत की वह बयान करता है कि आँ हज़रत(स) ने हमसे ख़िताब करते हुए दज्जाल का तज़किरा किया और फ़रमाया: मदीने से गंदगी को इस तरह दूर करेगा जिस तरह माद्दा लोहे की खोट को दूर करता है। पस उम्मे शरीक ने रसूलल्लाह(स) से अर्ज़ की या रसूलल्लाह उस रोज अरब कहाँ होगें¿ आपने इरशाद फ़रमाया: उस रोज़ अरब बहुत कम होगें, और सबके सब बैतुल मुक़द्दस में होगें। और उनका इमाम महदी(अ) होगा।
आख़री ज़माने में इमाम महदी की अलामत के बारे में अबी जाफ़र से रिवायत की गयी इमाम ने फ़रमाया: इमाम महदी रोज़े आशूरा ज़हूर फरमायेगें और यह वहीरोज़ है जिस दिन इमाम हुसैन(अ) शहीद हुए, दसवीं मुहर्रम थी और हफ़्ते का दिन था, महदी रुक्न व मक़ाम के दरमियान खड़े होगें दाहिनी जानिब जिबरईल(अ) और बाँये जानिब मीकाईल होगें। ज़मीन के हर गोशे से आपके शिया बैअत के लिये जमा हो जायेगें। आपके शियों के लिये ज़मीन सिमट जायेगी। आप ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगें जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
महदी(अ)के शियों के लिये ज़मीन की तनाबें सिमट जायेंगी। क़ुदरते ख़ुदा से ज़मीन के गोशे गोशे से लोग चंद लम्हात के अंदर मक्के में जमा हो जायेगें।[24]
हाकिमनेशापुरीकीमुस्तदरकअलससहीहैनमेंअबू सईद ख़िदरी बयान करते हैं रसूलल्लाह(स) ने इरशाद फऱमाया: मेरी उम्म्त के आख़री(ज़माने) में महदी ज़हूर करेगा। ख़ुदा वंदे आलम उसको बारिशों से सैराब फ़रमायेगा। और ज़मीन अपने नबातात को ज़ाहिर कर देगी, अमवाल की सहीह तक़सीम करेगा, जानवरों की कसरत होगी और उम्मते इस्लामिया साहिबे अज़मत होगी।
हाकिम नेशापुरी की मुस्तदरक अलस सहीहैन में पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत की गयी है, हज़रत ने फ़रमाया: मेरी उम्मत से महदी होगा, (जिस की हुकुमत) कम अज़ सात(साल) वर्ना नौ(साल) होगी। उसके ज़माने में मेरी उम्मत पर इस क़दर नेमतें नाज़िल होगीं जिस से कब्ल इस तरह नेमतों का नुज़ूल न हुआ होगा। ज़मीन खाने की तमाम चीज़ें अता करेगी जिसकी लोगों से ज़ख़ीरा अंदोज़ी न की जायेगी। उस रोज़ माल जमा होगा एक शख़्स खड़ा होगा और कहेगा इस माल को ले लो।
यनाबीउल मवद्दत में अबी ख़ालिद अलकाहिल ने इमाम जाफ़र सादिक़(अ)से अल्लाह तआला के इस क़ौल
فَاسْتَبِقُواْ الْخَيْرَاتِ أَيْنَ مَا تَكُونُواْ يَأْتِ بِكُمُ اللّهُ جَمِيعًا
(पस नेकीयों में जल्दी करो, तुम जहाँ भी होगे अल्लाह तुम सब को ले आयेगा।) की रिवायत की गयी है आपने फ़रमाया: आयत से क़ायम(अ) के असहाब मुराद हैं। जिनकी तादाद 313 होगी। ख़ुदा की क़सम उम्मते मअदूदह से यही लोग मुराद हैं यह सब लोग मौसमे ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश की तरह एक लम्हे में जमा हो जायेगें।
यनाबीउल मवद्दत में अल्लाह के इस क़ौल
ولئن اخرنا عنهم العزاب الی امةمعدودة
के बारे में रिवायत बयान की गयी रावी बयान करता है उम्मते मअदूदह से महदी के असहाब मुराद हैं जो आख़री ज़माने में होगें जिनकी तादाद 313 होगी। जिस तरह बद्र में रसूलल्लाह (स) के असहाब की तादाद 313 थी। सबके सब एक लम्हे में ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश की तरह जमा हो जायेगें।
तारिख़े इब्ने असाकर (शाफ़ेई) मेंइस तरह रिवायत की गयी है जिस वक़्त क़ायमें आले मुहम्मद(अ) ज़हूर फ़रमायेगें पस ख़ुदा वंदे आलम मशरिक़ व मग़रिब वालों को इस तरह जमा फ़रमायेगा जिस तरह मौसमे ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश होती है। चुनाँचे महदी के रोफ़क़ा अहले कूफ़ा से और अबदाल अहले शाम से होगें।[25]
यनाबीऊल मवद्दत मेंअल्लाह तआला के इस क़ौल
اعلموا ان الله یحی الارض بعد موتها
समझ लो कि ख़ुदा ज़मीन को ज़िन्दा करता है बाद इसके कि उसकी मौत वाक़े हो चुकी हो।, के बारे में सलाम बिन मुसतनीर के वास्ते से इमाम बाक़िर(अ) से रिवायत की गयी, इमाम ने फ़रमाया: (ख़ुदावंदे आलम) क़ायम के सबब ज़मीन को ज़िन्दा फ़रमायेगा जो कि ज़ुल्म के सबब से मुर्दा हो चुकी होगी और आप अपने अदल के ज़रीये उसको ज़िन्दा फ़रमायेगें।
यनाबीऊल मवद्दत में अल्लाह तआला के इस क़ौल
وَإِن مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلاَّ لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا
और अहले किताब में यक़ीनन उस पर ईमान लायेगें अपनी मौत से क़ब्ल और क़ियामत के दिन उन पर गवाह होगा।
(सूरह निसा आयत 159)
रावी बयान करता है क़ियामत से क़ब्ल ईसा(अ) नाज़िल होगें, उस वक़्त यहूदी और ग़ैर यहूदी कोई बाक़ी न रहेगा मगर सबके सब अपने इन्तेक़ाल से क़ब्ल(महदी) पर ईमान ले आयेगें। और ईसा(अ) इमाम महदी(अ) की इमामत में नमाज़ अदा करेगें।
तज़किरातुल ख़वास में सिब्ते इब्ने जौज़ी(अलहनफ़ी) बयान करता है कि सदयी बयान करता है कि महदी(अ) और ईसा(अ)(एक मक़ाम पर) जमा होगें। पस जब नमाज़ का वक़्त होगा, इमाम ईसा से फ़रमायेगें आप नमाज़ पढ़ायें लेकिन ईसा फ़रमायेंगें आप नमाज़ के लिये ज़्यादा बेहतर हैं पस ईसा इमाम महदी के साथ मामूम की हैसियत से नमाज़ पढ़ेंगें।
इमामकाक़ितालहक़परहोगा।
सही मुस्लिम में जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह अंसारी बयान करते हैं कि मैंने आँ हज़रत (स) को फ़रमाते सुना: मेरी उम्मत का एक गिरोह इज़हारे हक़ के लिये क़ियामत तक जंग करता रहेगा, पस ईसा(अ) तशरीफ़ लायेगें उनका हाकिम ईसा से कहेगा आईये हमें नमाज़ पढ़ाईये वह कहेंगें तुम में बअज़ बअज़ पर इस उम्मत की अता करदा बुज़ुर्गी के सबब हाकिम है।[26]
असआफ़ूर राग़ेबीन में सबान(अलहनफ़ी) बयान करता है कि बअज़ रिवायत में वारिद हुआ है कि इमाम के ज़हूर के वक़्त बुलंदी से एक फ़रिश्ता इस तरह आवाज़ देगा यह महदी ख़ुदा की ख़लीफ़ा है, पस तुम लोग इसकी पैरवी करो।  
लोगों के दिलों में आपकी मुहब्बत भर जायेगी। मशरिक़ व मग़रिब की हुकुमत आपके हाथों में होगी। रुक्न और मक़ामे इब्राहीम के दरमियान आपसे बैअक करने वालों की तादाद अहले बद्र(313) के बराबर होगी। फिर आपकी ख़िदमत में शाम के अबदाल हाज़िर होगें। ख़ुदावंदे आलम आपकी हिमायत में ख़ुरासान से लश्कर रवाना फ़रमाएगा जिनके परचम स्याह होगें, फिर आप शाम की जानिब मुतवज्जेह होगें और दूसरी रिवायत में है कि आप कूफ़े की जानिब मुतवज्जेह होगें। ख़ुदावंदे आलम आपकी नुसरत तीन हज़ार फ़रिश्तों से फ़रमाएगा। और असहाबे कहफ़ आपके मददगार होगें।
सुयूती का बयान है किअसहाबे कहफ़ के इस मुद्दत तक ताख़ीर करने की वजह यही है कि वह इस उम्मत में दाख़िल हों और ख़लीफ़ा ए हक़ से मुलाक़ात करें। और इमाम के लश्कर के आगे क़बीला ए तमीम का एक शख़्स होगा, जिसकी दाढ़ी ख़फ़ीफ़ होगी और नाम शुऐब इब्ने सालेह होगा जिबरईल आपके लश्कर के सामने और मीकाईल पुश्त पर होगें। सुफ़यानी अपने लश्कर के साथ ख़ुरूज करेगा। और मक़ामे बैदा में पहुच कर बर्बाद हो जायेगा। जिनमें से मुख़्बिर के सिवा कोई और न बचेगा। कामयाबी महदी(अ) की होगी और सुफ़यानी को क़त्ल कर दिया जायेगा।
असआफ़ुर राग़ेबीन मेंमहदी(अ) के बअज़ आसार के बारे में इस तरह बयान किया गया है:
·        आपका ज़ुहूर ताक़ सालों में होगा।
·        आपकी हुकुमत मग़रिब व मशरिक़ पर मुहीत होगी।
·        आपके लिये ख़ज़ाने ज़ाहिर होगें।
·        ज़मीन में किसी क़िस्म की तबाहकारी न होगी।
मुन्तख़बे कंज़ुल उम्माल में अली(अ) से रिवायत की गयी है, आपने फ़रमाया: तालेक़ान के लिये मुबारकबाद है। इसलिये कि तालेक़ान में ख़ुदावंदे आलम के खज़ाने हैं जिनका तअल्लुक़ न सोने से है न चाँदी से, बल्कि उसमें ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हे ख़ुदावंदे आलम की कामिल मारेफ़त हासिल है। और वह लोग इमाम महदी(अ) के अंसार होगें।

महदी (अ) के अंसार

सुनने इब्ने माजा, रसूलल्लाह(स) इरशाद फ़रमाया: मशरिक़ से लोग ज़ाहिर होंगें और महदी की हुकुमत तसलीम करेंगें।
सबान ने इसआफ़ूर राग़ेबीन में बयान किया है कि रिवायत में वारिद हुआ है इमाम महदी(अ) के ज़हूर के वक़्त एक मलक आवाज़ देगा। यह महदी ख़ुदा का ख़लीफ़ा है पस तुम लोग इसकी इत्तेबा करो और महदी

सुनने इब्ने माजा, रसूलल्लाह(स) इरशाद फ़रमाया: मशरिक़ से लोग ज़ाहिर होंगें और महदी की हुकुमत तसलीम करेंगें।
सबान ने इसआफ़ूर राग़ेबीन में बयान किया है कि रिवायत में वारिद हुआ है इमाम महदी(अ) के ज़हूर के वक़्त एक मलक आवाज़ देगा। यह महदी ख़ुदा का ख़लीफ़ा है पस तुम लोग इसकी इत्तेबा करो और महदी इनताकिया के ग़ार से ताबूते सकीना निकालेंगें। और शाम के पहाड़ से तौरेत की किताबों को निकालेंगें जिस की वजह से यहूदीयों पर आपकी हुज्जत क़ायम हो जायेगी। और उनमें से अकसर लोग ईमान ले आयेगें।
बग़वी की किताब मसाबीहुस सुन्ना में अबू सईद के वास्ते से पैग़म्बरे इस्लाम(स) से महदी के बारे में रिवायत की गयी हुज़ूर ने फ़रमाया: एक शख़्स सवाल करेगा या महदी मुझे कुछ अता करें चुनाँचे आप इस क़दर अता करेंगें जिस को वह संभालने रक क़ादिर नही होगा। और मुन्तख़बे कंज़ुल उम्माल में इस तरह है। हज़रत में फ़रमाया: मेरी उम्मत से महदी ज़हूर करेगा जो पाँच या सात या नौ साल ज़िन्दगी गुज़ारेगा उसके पास एक शख़्स आयेगा और कहेगा ऐ महदी मुझे अता कीजीये आप उसको अपने लिबास से इस क़दर अता करेंगें जिसको वह उठा नही सकेगा।
यनाबीऊल मवद्दत में अमीरुल मोमिनीन अली बिन अबी तालिब से रिवायत की गयी हज़रत ने फ़रमाया नुसरते ख़ुदा उस वक़्त तक नही आयेगी जब तक कि वह मौत से ज़्यादा आसान न हो जाये और उसी बारे में परवरदिगारे आलम का क़ौल है:
حَتَّى إِذَا اسْتَيْأَسَ الرُّسُلُ وَظَنُّواْ أَنَّهُمْ قَدْ كُذِبُواْ جَاءَهُمْ نَصْرُنَا [15]
ताकि जब वह पैग़म्बर अपनी इम्मत वालों के ईमान लाने से मायूस हो गये और उम्मत वालों ने यह गुमान कर लिया कि उनके झूट बोला गया है कि ख़ुदा उनकी मदद करेगा तो उस वक़्त हमारी मदद उनके पास आयेगी।
औरयहउसीवक़्तहोगाजबहमाराक़ायमज़हूरकरेगा।
मुन्तख़ब कंज़ुल उम्माल में आँ हज़रत(स) से रिवायत की गयी हज़रत ने फ़रमाया: हम अहले बैत ही की वह फ़र्द होगा जिसकी इमामत में ईसा नमाज़ अदा करेंगें।
आँ हज़रत(स) ने इरशाद फ़रमाया: जब महदी मुतवज्जेह होगें और ईसा बिन मरियम नाज़िल होगें और उनके बालों से पानी के क़तरात टपक रहें होंगें, उस वक़्त इमाम महदी(अ) ईसा(अ) से फ़रमायेगें आप लोगों को नमाज़ पढ़ाईये, ईसा फ़रमायेगें नमाज़ का क़याम आपके ज़रीये होगा। चुनाँचे ईसा मेरे फ़रज़ंद महदी की इमामत में नमाज़ अदा करेगें।
ग़ायतुल मामूल
अनवारूत तंज़ील में इस आयत
وَإِنَّهُ لَعِلْمٌ لِّلسَّاعَةِ[16]
की तफ़सीर इस तरह बयान की गयी कि ईसा ज़मीन के पाक व पाकीज़ा मक़ाम(अफ़ीक़) पर नाज़िल होंगें। आपके हाथों में ख़ंजर होगा जिससे आप दज्जाल को क़त्ल करेंगें उसके बाद आप बैतुल मुक़द्दस तशरीफ़ लायेगें। जबकि लोग नमाज़ सुबह पढ़ रहे होगें पस इमाम पीछे रहेंगें और ईसा इमाम को आगे बढ़ायेगें और उनके पीछे नमाज़ अदा करेगें, ईसा की नमाज़ शरीअते मुहम्मदी पर होगी।
महदी(अ.) कापरचम
हाफ़िज़ क़ंदूज़ी की यनाबीऊल मवद्दत में नौफ़ से रिवायत है वह बयान करता है इमाम महदी के परचम पर लिखा होगाالبیعة للهयानी बैअत सिर्फ़ अल्लाह के लिये मख़्सूस है।[17]
मुत्तक़ी हिन्दी इब्ने उमर से रिवायत से करते हैं कि आँ हज़रत ने अली का हाथ अपने हाथों में लिया और फ़रमाया अली के सुल्ब से एक जवान ज़ाहिर होगा जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से भर देगा पस जिस वक़्त तुम यह देखो तो तुम तमीमी जवान के साथ हो जाना इसलिये कि यह शख़्स मशरिक़ वारिद होगा और महदी का अलमबरदार होगा।
रिवायत की गयी है कि इमाम हसन असकरी(अ) के यहाँ एक बच्चे की विलादत हुई पस उन्होने उस बच्चे का नाम मुहम्मद रखा और तीसरे रोज़ अपने असहाब के सामने लाये और फ़रमाया यह मेरे बाद तुम्हारा इमाम और तुम पर मेरा ख़लीफ़ा है। यह वह क़ायम है जिसके इन्तेज़ार में गर्दने लंबा हो जायेगीं पस जिस वक़्त ज़मीन ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी उस वक़्त ज़हूर करेगा और उसको अदल व इंसाफ़ से भर देगा।
महदी से हर चीज़ ख़ुश होगी
आँ हज़रत से महदी के रुक्न और मक़ाम के दरमियान बैअत और आपके शाम की जानिब से ज़हूर फ़रमाने की रिवायत की गयी हज़रत ने फ़रमाया जिबरईल महदी के आगे और मीकाईल पीछे होगें। महदी से अहले आसमान व ज़मीन, परिंदे, दरिंदे और समंदर की मछलीयाँ ख़ुश होगीं।
(अलबुरहान फ़ी अलामात महदी आख़िरुज़्ज़मान)
 

हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के असहाब

हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के असहाब 313 हैं।
हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के बारे में लिखी गई किताबों में यह ज़िक्र मिलताहै कि आपके ज़हूर के वक़्त उनके 313 ख़ास असहाब

उनसे आकर मिलेंगे और हर मुशकिल मेंपहाड़ की तरह जम कर इमाम के साथ रहेंगे। यह हदीस बिहारुल अनवार, इस्बातुल हुदात औरमुन्तख़बुल असर जैसी किताबों में नक़्ल हुई है।
हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के असहाब  की विशेषताएं
1- हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम उनके इन्तेज़ार में है।
ज़हूर के वक़्त इससे पहले कि वह काबे के पास जाये और काबे से लग कर खड़े हों औरअपनी बलन्द आवाज़ को पूरी दुनिया के लोगों तक पहुँचाये, ज़ी तवा नामक जगह पर अपने313 ख़ास असहाब के इन्तेज़ार में रुकेगें ताकि वह आकर इमाम से मिल लें ......वहाँसे फिर वह इमाम के साथ ख़ाना काबा के पास जायेंगे।
2- यह 313 असहाब पूरी दुनियाँ से इकठ्ठा होंगे।
हज़रत इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि अल्लाह हज़रत क़ाइम केलिए, जंग बद्र में लड़ने वालों की तादाद (313) के बराबर इंसानों को दूर दूर केशहरों से इकठ्ठा करेगा। 
3- वह सबसे पहले इमाम की बैअत करेंगे।
रिवायत में है कि ज़हूर के वक़्त जिबरईल के बाद इमाम की बैअत करने वाले यही 313 असहाब होंगे।
इस बात पर तवज्जोह रहे कि ज़हूर के वक़्त इमाम के असहाब की तादाद 313 है लेकिन हतादाद बढ़ती रहेगी और ज़हूर के फ़ौरन बाद ही 10000 तक पहुँच जायेगी।
4- वह बहादुर व जानिसार होंगे।
हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि " वह 313 असहाब इतने बहादुर औरजानिसार होंगे कि जब दुशन जमा होकर क़ाइमे आले मुहम्मद को क़त्ल करना चाहेंगे तो यह313 असहाब की बहादुरी के साथ हज़रत का दिफ़ा करेंगे। "
5- वह ज़मीन पर हाकिम होंगे।
हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि " ऐसा है जैसे में इमामे क़ाइम कोकूफ़े के मिम्बर पर देख रहा हूँ और उनके असहाब, जंगे बद्र में मुसलमानों की तादादके बराबर, यानी 313 उनको चारो तरफ़ से घेरे हैं। यह असहाब अल्लाह की तरफ़ से ज़मीनपर हाकिम है। "
6- वह उम्मते मादूदा हैं।
क़ुरआने करीम की आयत है कि तुम जहाँ पर भी होंगे अल्लाह तुम सबको जमा करेगा। इसआयत की तफ़्सीर करते हुए हज़रत इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया किअल्लाह की क़सम सूरः ए हूद में उम्मते मादूदा से मुराद वह हैं। अल्लाह की क़सम वहसब एक पलमें इस तरह जमा हो जायेंगे, जिस तरह हवा के असर से बादल जमा हो जाते हैं।
7- 313 असहाब में से 50 औरतें हैं।
हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया है कि अल्लाह की क़सम बादलों की तरहआने वाले उन तीन सौ तेरह असहाब में 50 औरतें हैं।