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2011-07-15

हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम

हदीसे रसूल की रौशनी में

बिलस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

मुक़द्दमा

का नामे नामी तमाम आसमानी किताबों तौरैत, ज़बूर, इन्जील में मौजूद है।

क़ुरआने करीम की कई आयात में आपके बारे में तफ़्सीर व तावील की गई है।

पैगम्बरे इस्लाम (स.) की ज़बाने मुबारक से मक्के, मदीने में, मेराज के मौक़े पर और दूसरी मुनासेबतों पर तमाम ही आइम्मा-ए मासूमीन के बारे मुख़तलिफ़ हदीसे जारी हुई हैं।

अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने भी अपने बेटे महदी का ज़िक्र किया और हज़रत ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा ने भी इमाम महदी का तज़केरा फ़रमाया है। इसी तरह हज़रत इमाम हसन और हज़रत इमाम हुसैन हज़रत इमाम सज्जाद हज़रतिमाम बाक़िर हज़रत इमाम सादिक़ हज़रत इमाम रिज़ा हज़रत इमाम मुहम्द तक़ी हज़रत इमाम अली नक़ी व हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिमु अस्सलाम ने भी अपने बेटे इमाम महदी का ज़िक्र किया है।

पैग़म्बरे इस्लाम (स.) के असहाब में से अबू बकर, उमर, उस्मान, अब्दुल्लाह इब्ने उमर, अबू हुरैरा, समरा बिन जुन्दब, सलमान, अबुज़र, अम्मार और इनके अलावा भी बहुत से असहाब ने हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र किया है।

पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की बीवियों में से आइशा, हफ़सा, उम्मे सलमा और कई दूसरी बीवियों ने हज़रत इमाम महदी का ज़िक्र किया है।

ताबेईन में औन बिन हुजैफ़ा, इबादियः बिन रबी और क़ुतादा जैसे अफ़राद ने इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र किया है।

तफ़्सीर की किताबों में से, तफ़्सीरे तबरी, तफ़्सीरे राज़ी, तफ़्सीरुल ख़ाज़िन, तफ़्सीरे आलूसी, तफ़्सीरे इब्ने असीर, तफ़्सीरे दुर्रुल मनसूर वग़ैरह में आप हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र पायेंगे।

इसी तरह आपको सहाए सित्ता, बुख़ारी, मुस्लिम, इब्ने माजा, अबू दाऊद, निसाई और अहमद में भी हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र मिलेगा।

हदीस की दूसरी किताबें जैसे मुस्तदरके सहीहैन, मजमा उज़ ज़वाइद, मुसनदे शाफ़ई, सुनने दार क़ुतनी, सुनने बहीक़ी, मुसनदे अबी हनीफ़ा, क़न्ज़ुल उम्माल बग़ैरा में हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र मौजूद है।

तारीख़ की किताबों में से तारीख़े तबरी, तारीख़े इब्ने असीर, तारीख़े मसूदी, तारीख़े सयूती, तीरीख़े इब्ने ख़लदून वग़ैरा में भी हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के बारे में लिखा गया है।

मुसलमानों के मुख़तलिफ़ फ़िर्क़ों के उलमा हज़रत इमाममहदी पर एतेक़ाद रखते हैं। उन्होंने इसका ज़िक्र अपनी किताबों, ख़ुत्बों वग़ैरा में कसरत से किया है। इन उलमा में हनफ़ी, शाफ़ी, हम्बली और मालकी सभी शामिल हैं। इनके अलावा भी दूसरे मज़हबों के उलमा और उनके मानने वालों ने हज़रत का ज़िक्र किया है।

क़ुरआनी मुक़ारेनत

क़ुरआने करीम पर तहक़ीक़ी नज़र डालने से हम इन नतीजों पर पहुँचते हैं।

क़ुरान में इस्लाम के सबसे अहम फ़रीज़े, नमाज़ का ज़िक्र है, पैग़म्बरे इस्लाम(स.) ने इसके बारे में फ़रमाया कि

1.महदी (अ.) इमाम और ईसा मामूम होंगे

अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वा आलिहि वसल्लम ने बयान फ़रमाया: यक़ीनन मेरे बाद मख़लूक़ पर अल्लाह की जानिब से मेरे बारह ख़ुलाफ़ा और औसिया हुज्जत होगें। जिनमें से पहला मेरा भाई और आख़िरी मेरा फ़रज़न्द होगा। लोगों ने अर्ज़ की, या रसूलल्लाह आपका भाई कौन है ?हज़रत ने फ़रमाया: अली इब्ने अबी तालिब।

सवाल किया गया कि आपका फ़रज़न्द कौन है ? आपने फ़रमाया मेरा फ़रज़न्द वह महदी है, जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से भर देगा। बिल्कुल उसी तरह जिस तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भर चुकी होगी। उस ज़ाते पाक की क़सम जिसने मुझे हक़ के साथ बशारत देने वाला बना कर भेजा है, अगर दुनिया सिर्फ़ एक दिन भी बाक़ी रह जायेगी तो ख़ुदावन्द उस दिन को इस क़दर तूलानी कर देगा कि मेरा फ़रज़न्द ज़हूर करे और रूहूल्लाह ईसा इब्ने मरियम नाज़िल हो कर महदी की इमामत में नमाज़ अदा करेंगे और महदी के नूर से ज़मीन रौशन हो जायेगी और उसकी हुकुमत मशरिक़ से मग़रिब तक होगी।

2.महदी (अ.) रसूलुल्लाह (स.) के साथ जन्नत में

मदीने के एक यहूदी ने अमीरूल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब (अ.) से यह सवाल किये:

1- या अली! मुझे बताईये कि इस उम्मत के नबी (स.) के बाद कितने इमाम होगें?

2- मुझे बताईये कि जन्नत में मुहम्मद (स.) का दर्जा कहाँ है ? और यह भी बताईये कि मुहम्मद (स.) के साथ और कौन होगा ?

हज़रत अली (अ.) ने फ़रमाया: इस उम्मत में नबी (स.) के बाद बारह इमाम होगें और लोगों की मुख़ालेफ़त उनको कुछ नुक़सान न पहुचा सकेगी।

यहूदी ने कहा: आपने बिल्कुल सही फ़रमाया।

हज़रत ने फिर फ़रमाया: मुहम्मद (स.) का मक़ाम जन्नते अदन है। उसका बालाई हिस्सा परवरदिगार के अर्श से क़रीब होगा।

यहूदी ने अर्ज़ की "आपने सही फ़रमाया"

हज़रत अली (अ.) ने फिर फ़रमाया: जन्नत में मुहम्मद (स.) के हमराह बारह इमाम होगें, जिनका अव्वल मैं हूँ और आख़िरी क़ायम अलमहदी (अ.) हैं।

यहूदी ने अर्ज़ की: आपने सच फ़रमाया।

(किताब यनाबी उल मवद्दत)

किफ़ायतुल असर में अबी सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि वह बयान करते हैं मैंने रसूलल्लाह (स.) को यह फ़रमाते सुना: मेरे अहले बैत, अहले ज़मीन के लिए उसी तरह अमान हैं, जिस तरह आसमान वालों के लिए सितारे अमान हैं।

लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह (स.) आपके बाद आईम्मा आपके अहलेबैत से होगें ? हज़रत ने फ़रमाया: हाँ मेरे बाद बारह इमाम होगें जिनमें से नौ हुसैन की सुल्ब से अमीन और मासूम होगें और इस उम्मत में महदी हम ही में से होगा। (आगाह रहो) यह सबके सब मेरे अहले बैत और मेरी औलाद से मेरे गोश्त और ख़ून होगें। उन क़ौमों का क्या हश्र होगा जो मेरी ज़ुर्रियत व अहलेबैत के ज़रिये मुझे अज़ियत देगें। ख़ुदावन्दे आलम ऐसे लोगो को मेरी शिफ़ाअत नसीब न करेगा।

हदीसुल मुनाशिदा

हाफ़िज़ अलक़न्दूज़ी हदीसे मुनाशिदा की रसूलल्लाह (स.) के असहाब से रिवायत करते हैं। वह बयान करते हैं कि जिस वक़्त  आयते الْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِي وَرَضِيتُ لَكُمُ الإِسْلاَمَ دِينًا   नाज़िल हुई तो हुज़ूर (स.) ने फ़रमाया अल्लाहु अकबर दीन कामिल हो गया। नेमतें तमाम हो गयीं और मेरा परवरदिगार मेरी रिसालत और मेरे बाद अली (अ.) की विलायत से राज़ी हो गया। लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह यह आयतें अली (अ.) से मख़सूस हैं? हज़रत ने फ़रमाया हाँ !यह आयतें अली और क़ियामत तक आने वाले मेरे औसिया से मख़सूस हैं। लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह हमारे लिए बयान फ़रमाइये हज़रत ने बयान फ़रमाया अली (अ.) मेरा भाई और मेरा वारिस व वसी और मेरे बाद तमाम मोमीनीन का वली है। फिर मेरा फ़रज़न्द हसन, फिर हुसैन उनके बाद हुसैन के नौ फ़रज़न्द मेरे औसिया होगें। क़ुरआन उनके साथ है और वह क़ुरआन के साथ हैं। न यह क़ुरआन से जुदा होगें और न क़ुरआन उनसे जुदा होगा। यहाँ तक कि यह सब के सब मेरे पास हौज़े (कौसर) पर वारिद होगें। (यहाँ तक कि हुज़ूर (स.) ने फ़रमाया) मैं तुम्हे ख़ुदा की क़सम दे कर सवाल करता हूँ। क्या तुम जानते हो कि ख़ुदा वन्दे आलम ने सूरए हज में इरशाद फ़रमाया है:

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا ارْكَعُوا وَاسْجُدُوا وَاعْبُدُوا رَبَّكُمْ وَافْعَلُوا الْخَيْرَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ

ऐ ईमान लाने वालो ऱूकू व सुजूद बजा लाओ (यानी नमाज़ पढो) और सिर्फ़ अपने परवरदिगारे हक़ीक़ी की इबादत करो और नेकी करो। सूरः की बाद की आयतें इस तरह हैं [1]

सलमान ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह वह कौन लोग हैं जिनके (आमाल व अफ़आल) पर आपको गवाह बनाया गया है और उनको दूसरे लोगों (के आमाल व अफ़आल पर) गवाह मुक़र्रर किया गय है, जिनको ख़ुदावन्दे आलम ने मुनतख़ब किया है और मिल्लते इबराहीम से उन पर दीन (के मुआमलात) में किसी क़िस्म की तंगी (सख्ती) को रवा नही रखा गया है?हज़रत ने फ़रमाया: इस अम्र से सिर्फ़ 13 हज़रात मुराद हैं। सलमान ने अर्ज़ की (या रसूलल्लाह) इरशाद फ़रमाईये, फ़रमाया मैं और मेरे भाई और मेरे 11 फ़रज़न्द हैं।

इमाम हम्बल बयान करते हैं: रसूलल्लाह (स.) ने हुसैन (अ.) के लिए फ़रमाया: मेरा यह फ़रज़न्द इमाम है, इमाम का भाई और 9 इमामों का बाप है जिनमें का आखिरी क़ाइम (अ.) है।(मुस्नद अहमद बिन हम्बल)

नासल रसूलल्लाह से सवाल करता हैं: इब्ने अब्बास का बयान है कि नासल यहूदी पैग़म्बरे इस्लाम की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और अर्ज़ की ऐ मुहम्मद ! मैं आप से कुछ ऐसी चीज़ों के मुतअल्लिक़ सवाल करना चाहता हूँ, जो एक ज़माने से मेरे सपने में ख़लिश बनी हुई हैं। हज़रत ने फ़रमाया बयान करो: उसने कहा"आप मुझे अपने वसी के बारे में बतालाइये ? इसलिए कि कोई नबी ऐसा नही गुज़रा जिसका वसी न हो। हमारे नबी मूसा बिन इमरान ने यूशा बिन नून को अपना वसी मुक़र्रर किया।

हज़रत ने फ़रमाया: मेरे वसी अली इब्ने अबितालिब हैं और उनके बाद मेरे दो नवासे हसन और हुसैन होगें फिर यके बाद दीगर हुसैन की औलाद से नौ इमाम होगें।

नासल ने कहा: आप मुझे उनके नाम बताईये। हज़रत ने फ़रमाया: हुसैन के बाद उनका फ़रज़न्द अली होगा और उनके बाद उनका फ़रज़न्द मुहम्मद होगा और उनके बाद उनका फ़रज़न्द जाफ़र होगा और उनके बाद उनका फ़रज़न्द मूसा फिर उनका फ़रज़न्द अली होगा फिर उनका फ़रज़न्द मुहम्मद होगा फिर उनका फ़रज़न्द अली होगा फिर उनका फ़रज़न्द हसन होगा फिर उनका फ़रज़न्द हुज्जत मुहम्मद महदी होगा जो कि बारह हैं। [2]

3.महदी (अ.) का ज़हूर यक़ीनी है।

मुहम्मद बिन अली तिरमीज़ी अपनी सहीह में पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से रिवायत करते हैं, हज़रत ने फ़रमाया: यानी दुनिया फ़ना नही होगी, यहाँ तक कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स तमाम अरब पर हुकुमत करेगा जिस का नाम मेरे नाम पर होगा।

इमाम हम्बल बयान करते हैं रसूलल्लाह ने फ़रमाया ज़माना बाक़ी रहेगा यहाँ तक कि मेरे अहलेबैत में से एक शख़्स तमाम अरब का मालिक क़रार पायेगा। उसका नाम मेरे नाम पर होगा। [3]

सहीहे तिरमीज़ी में रसूलुल्लाह (स.) से इस तरह रिवायत की गई है कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा जिसका नाम मेरे नाम पर होगा।

अहमद अपनी मुस्नद में रसूलुल्लाह (स.) से रिवायत करते हैं कि हुज़ूर (स.) ने फ़रमाया कि क़ियामत उस वक़्त तक नही आयेगी, जब तक कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर न हो जाये और उसका नाम मेरे नाम पर होगा।

अबी सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि वह बयान करते हैं कि हमें नबी ए करीम (स.) के बाद कोई हादेसः वाक़े होने का ख़ौफ़ दामनगीर था, चुनान्चे हमने हज़रत से सवाल किया। आपने फ़रमाया मेरी उम्मत से महदी ज़हूर करेगा जो पाँच या सात या नौ साल तक ज़िन्दगी गुज़ारेगा। [4]

अबु दाऊद पैग़म्बरे इस्लाम(स.) से रिवायत करते हैं हुज़ूर ने फ़रमाया: अगर ज़माना एक रोज़ भी बाक़ी रहेगा यक़ीनन ख़ुदावन्दे आलम मेरे अहलेबैत से एक शख़्स को ज़ाहिर करेगा जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से उसी तरह भर देगा जिस तरह से वह उससे पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। (सहीहे अबी दाऊद)

अबू दाऊद पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से रिवायत करते हैं कि हज़रत ने फ़रमाया: दुनिया ख़त्म न होगी यहाँ तक कि मेरे अहले बैत से एक शख़्स तमाम अरब का हाकिम क़रार पायेगा, उसका नाम मेरे नाम पर होगा। (अबू दाऊद का का बयान दूसरी हदीस में इस तरह है) जो कि ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

4.महदी फ़रज़न्दे फ़ातिमा ज़हरा हैं।

अबू दाऊद उम्मे सलमा से रिवायत करते हैं कि उम्मे सलमा फ़रमाती हैं कि मैने रसूलल्लाह (स.) को फ़रमाते सुना:

المهدی من عترتی من ولد فاطمة

महदी मेरी औलाद से फ़ातिमा का फ़रज़न्द है।

(सहीहे अबी दाऊद)

अबू दाऊद, अबी सईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया:

(मेरा महदी बलन्द पेशानी और बलन्द नाक वाला होगा। जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

सहीहे बुख़ारी में अबू क़ुतादा अंसारी के ग़ुलाम नाफ़े से रिवायत की गई है। वह बयान करता है कि अबू हुरैरा ने बयान किया कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: उस वक़्त तुम क्या करोगे, जबकि तुम्हारे दरमियान इब्ने मरियम (हज़रतेईसा) नाज़िल होगें और तुम्हारा इमाम तुम लोगों में से होगा?

5.महदी (अ.) अहले बैत से हैं।

सहीहे इब्ने माजा में रसूलल्लाह (स.) से रिवायत की गई है कि हुज़ूर ने फ़रमाया: महदी अहलेबैत से होगा (जिसके ज़रिये) ख़ुदावन्दे आलम एक ही रात में इस्लाह फ़रमायेगा।

सहीहे इब्ने माजा: में अनस इब्ने मालिक से रिवायत की गई है कि मालिक बयान करता है कि मैने रसूलल्लाह (स.) को फ़रमाते सुना हज़रत ने फ़रमाया: अब्दुल मुत्तलिब की औलाद में से मैं और हमज़ा व अली व जाफ़र, हसन व हुसैन और महदी जन्नत वालों के सरदार हैं।

मुस्नदे अहमद बिन हम्बल:

में अबू सईद से रिवायत की गई है। वह बयान करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया:(जब) ज़मीन ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी तो मेरी औलाद से एक शख़्स ज़हूर करेगा जो 7 या 9 साल हुकुमत करेगा और ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा।

6.महदी (अ.) आख़री ज़माने में आयेगें।

हाकिम नेशापुरी की मुसतदरक अस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है। उनका बयान है कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने फ़रमाया आख़िरी ज़माने में मेरी उम्मत पर उनके बादशाहों की जानिब से ऐसी शदीद मुसीबतें नाज़िल होगीं कि इससे पहले उनसे ज़्यादा शदीद मुसीबत कभी न सुनी होगी। यहाँ तक कि ज़मीन उन पर तंग हो जायेगी और ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी। मोमिन के लिए ज़ुल्म से महफ़ूज़ रहने के लिए कोई पनागाह न होगी। पस ख़ुदावन्दे आलम मेरे अहले बैत से एक शख़्स को भेजेगा जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। अहले आसमान और अहले ज़मीन उससे ख़ुश होगें। ज़मीन अपने अनाज के दाने ज़खीरे न करेगी, मगर उनके लिए निकाल देगी और आसमान भी बारिश के क़तरात न रोकेगा मगर ख़ुदावन्दे आलम उन पर मूसलाधार पानी बरसायेगा। महदी उन लोगों के दरमियान 7 या 8 या 9 साल ज़िन्दगी गुज़ारेगा उस ज़माने में ख़ुदा वंदे आलम की ख़ैर व बरकत देखकर मुर्दा लोग ज़िन्दगी की ख़्वाहिश करेंगें।

मुसतदरके अहमद में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: मैं तुम लोगों को महदी की बशारत देता हूँ, जो मेरी उम्मत से है। लोगों के इख़्तेलाफ़ और ज़लज़लों के ज़माने में ज़ाहिर होगा। वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। ज़मीन व आसमान में बसने वाले उससे राज़ी होगें। लोगों के दरमियान माल को हिस्सों में तक़सीम करेगा। एक शख़्स ने सवाल किया सहाहन क्या है ? आपने फ़रमाया: (यानी) लोगों के दरमियान माल को (सही तरीक़े से) या मसावात व बराबरी के साथ तक़सीम करेगा। हज़रत (स.) ने फ़रमाया और ख़ुदावन्दे आलम मुहम्मद (स.) की उम्मत के दिलों को तवंगरी से भर देगा।

कनुज़ुल हक़ाइक़ मेंअल्लामा मनावी रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने  फ़रमाया: महदी जन्नत वालों के ताऊस हैं। [5]

जामे उस सग़ीर मेंहाफ़िज़ सियुती (शाफ़ेई) रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: महदी मेरी औलाद से होगा, जिसकी पेशानी चमकते सितारे की तरह होगी।

मुसनदे अहमद बिन हम्बल मेंइमाम अबू सईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: उस वक़्त तक क़ियामत नही आएगी जब तक मेरे अहले बैत से एक शख़्स, मेरी उम्मत में ज़ाहिर न होगा (और) वह  ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी  और वह 7 साल हुकुमत करेगा।

अलमुस्तदरक अस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: क़ियामत नही आयेगी यहाँ तक कि ज़मीन ज़ुल्म व जौर से और सरकशी से भर जायेगी। फिर मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़हूर करेगा और उसको अदल व इंसाफ़ से भर देगा, जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

यनाबी उल मवद्दत में क़तादा से रिवायत की गई है, क़तादा बयान करते हैं कि मैने सईद इब्ने मुसैयब से पूछा कि क्या महदी का ज़हूर हक़ है? उसने जवाब दिया हाँ, महदी औलादे फ़ातिमा (अ.) से बरहक़ हैं। मैने कहा महदी फ़ातिमा की कौन औलाद हैं, जवाब मिला कि तुम्हारे लिए सिर्फ़ इतना ही काफ़ी है।